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Kushinagar News: इस बरसात भी डूबेंगे कई विद्यालय... बच्चे पढ़ेंगे या खेलेंगे छपाक-छपाक

Thu, 25 May 2023 12:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना के उदित नारायण इंटर कॉलेज में जलभराव कब बीच एनसीसी का प्रशिक्षण लेते कैडेट्स। (फ़ाइल फ़ो
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शहर के लो लैंड वाले विद्यालयों में विद्यार्थियों और शिक्षकों को उठानी पड़ेगी परेशानी
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फोटो है।
शहर के एक परिषदीय, एक राजकीय और तीन वित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के परिसर हैं लो-लैंड
स्कूल परिसर में लंबे समय तक जलभराव होने से विद्यार्थियों में बनी रहती है जलजनित बीमारियां होने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। शहर के एक परिषदीय, एक राजकीय और चार माध्यमिक समेत कुल पांच विद्यालयों का परिसर लो लैंड है। यहां जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से बीते कई वर्षों से बरसात के दिनों में परिसर में पानी भर जाता है। इससे न केवल शिक्षक और विद्यार्थियों को स्कूल आने में परेशानी होती है, बल्कि जलभराव वाले दिनों में पढ़ाई भी प्रभावित रहती है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए इस वर्ष भी स्कूल प्रशासन और जिला प्रशासन की तरफ से कोई इंतजाम नहीं हुआ है। इस वजह से बरसात में भी विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पडरौना शहर में दो जूनियर व आठ प्राथमिक समेत कुल दस परिषदीय विद्यालयों के अलावा एक राजकीय, तीन वित्तपोषित और छह स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालय संचालित होते हैं। इसमें कक्षा एक से 12वीं तक 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन है। इन विद्यालयों में से शहर के रामकोला रोड पर संचालित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज, हनुमान इंटर कॉलेज और रेलवे स्टेशन रोड स्थित उदित नारायण इंटर कॉलेज के अलावा कोतवाली के सामने बीआरसी परिसर में संचालित संविलियन विद्यालय का परिसर मुख्य सड़क से करीब दो से तीन फीट नीचे है।
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इन विद्यालयों का परिसर लो लैंड होने से हल्की बारिश होने पर भी पानी एकत्र हो जाता है। यदि एक घंटे भी मूसलाधार बारिश हो गई, तो इन विद्यालयों के परिसर में डेढ़ से दो फीट पानी एकत्र हो जाता है। बारिश बंद होने के बाद जब तक पानी कम होता है, उससे पहले ही पुन: बारिश हो जाती है। इससे जितना पानी सूखता है उससे अधिक पानी स्कूल परिसर में पुन: एकत्र हो जाता है। बरसात के दिनों में यदि दो से तीन दिन लगातार बारिश हो गई तो इन विद्यालयों के परिसर में घुटने भर पानी एकत्र हो जाता है। इससे पूरे बरसात भर इन विद्यालयों में बारिश का पानी भरा रहता है।
विद्यालय प्रबंधन के पास परिसर में एकत्र पानी की निकासी के लिए कोई इंतजाम नहीं होने और जिला प्रशासन की तरफ से भी कोई प्रयास नहीं होने के चलते बारिश का पानी कई दिनों तक भरा रहता है। इससे विद्यालय आने वाले शिक्षक और छात्र-छात्राओं को परेशानी उठानी पड़ती है। विद्यालय परिसर कई दिनों तक पानी एकत्र होने से विद्यालयों में छात्र उपस्थिति भी अन्य दिनों की अपेक्षा कम हो जाती है, जिससे विद्यालय में शिक्षण कार्य प्रभावित हो जाता है।
इसके अलावा स्कूल परिसर में पानी भरने से विद्यालय आने वाले छात्र-छात्राओं और स्कूल के आस-पास रहने वाले लोगों को डेंगू, मलेरिया, कालरा, टायफाइड, इंसेफेलाइटिस समेत अन्य जलजनित बीमारी होने की आशंका बनी रही है।

चलाते हैं जागरूकता अभियान, लेकिन नहीं करते जलभराव से बचाव के उपाय

आश्चर्य की बात यह है कि शासन के निर्देश पर विद्यालयों में नया शैक्षिक सत्र शुरू होने के बाद अप्रैल से सितंबर तक विशेष जागरूकता कार्यक्रम होता है। जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए जिला प्रशासन विद्यालयों के सहयोग से व्यापक स्तर पर जागरूकता रैली, गोष्ठी समेत अन्य जागरूकता कार्यक्रम करता है। इसमें विद्यार्थी और अन्य लोगों को जागरूक करते हैं, लेकिन इन विद्यालयों के परिसर में हुए जलभराव से निजात दिलाने के लिए न तो जिला प्रशासन और न ही स्कूल प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं। जिला प्रशासन और स्कूल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि बीते कई वर्ष से बरसात शुरू होते ही विद्यालय परिसर में जलभराव की समस्या शुरू हो जाती है। इसके बाद भी इससे निपटने के लिए अब तक कोई प्रयास नहीं किया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि इस वर्ष भी बरसात के दिनों में शिक्षकों और विद्यार्थियों को विद्यालय परिसर में होने वाले जलभराव से परेशान होना पड़ेगा।
कोट
मुख्य सड़क से इन कॉलेजों का परिसर नीचे है। बरसात के दिनों में अधिक बारिश होने पर ही स्कूल परिसर में पानी एकत्र होता है। विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए मोटर लगाकर स्कूल परिसर से पानी निकलवाया जाता है। विद्यालय के पास कोई अतिरिक्त फंड नहीं है, ताकि मिट्टी भराई कर इस समस्या से निजात दिलाई जा सके। हालांकि, मुख्य गेट के पास ऊंचा कर सड़क की तरफ से आने वाले पानी को रोक दिया गया है। इससे पिछले वर्ष से स्कूल परिसर में बारिश का पानी कम एकत्र हो रहा है। प्रबंधकीय विद्यालय प्रबंधकीय कोष से धन जुटाकर परिसर में मिट्टी भराई कर सकते हैं।
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- रविंद्र सिंह, डीआईओएस
कोट
किसी भी स्थान पर जलभराव होने से जलजनित बीमारियां जैसे इंसेफेलाइटिस, कालाजार, कालरा, मलेरिया, डेंगू आदि बीमारियां होने की आशंका अधिक रहती है। इससे बचाव के लिए किसी भी स्थान पर अधिक समय तक पानी एकत्र न होने दें। यदि किसी वजह से पानी एकत्र होता है तो उसमें एंटी लार्वा का छिड़काव करें, ताकि जलजनित बीमारियों का जन्म देने वाले कीट मर जाएं।
- डॉ. संजीव सुमन, प्रभारी चिकित्साधिकारी, पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय, पडरौना
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