कृष्णा के साथियों से बातचीत करती पुलिस। संवाद
हाटा। कृष्णा दूबे की मौत ने परिवार को कभी नहीं भूलने वाला जख्म दे दिया है। दो भाइयों में बड़े कृष्णा को बचपन से ही ज्योतिष में गहरी रुचि थी। वह परिवार में हमेशा इससे जुड़ी बातें करता रहता था। इस घटना का डीआईओएस ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने संस्कृत विद्या प्रबोधनी पाठशाला और छात्रावास की जांच कराने की बात कही है। कृष्णा के दादा सीआरपीएफ में हैं। उनकी तैनाती प्रयागराज में है। पिता धनंजय दूबे कर्नाटक में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं, जबकि मां गृहणी हैं। कृष्णा से मिलने के लिए अक्सर उसकी दारी गोदावरी देवी ही आती थीं। दादी ने बताया कि उसका सपना ज्योतिषाचार्य बनने का था। उसके इसी सपने को पूरा करने के लिए उसे घर परिवार से दूर संस्कृत विद्यालय में रह कर पढ़ाई करने के लिए भेजा गया था। परिवार के लोगों को क्या पता था कि जो दूसरों का भविष्य बताने की पढ़ाई कर रहा है उसी के जीवन का अंत कुछ दिनों में हो जाएगा। कृष्णा की मौत की सूचना मिलने के बाद विद्यालय पहुंची उसकी दादी गोदावरी देवी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। उन्होंने बताया कि उनसे कृष्णा की एक दिन पहले ही फोन पर बात हुई थी। उसने दो दिन बाद घर आने की बात कही थी। आज उसकी मौत की जानकारी होने पर परिवार के लोगों पर कहर टूट गया है। गोदावरी देवी ने बताया कि कृष्णा को बचपन से ही धर्म और पूजा पाठ में काफी रुचि थी। एक बार उनके घर में धार्मिक आयोजन हुआ था। उसके बाद से उसने ज्योतिष सीखने की इच्छा जताई थी। कक्षा पांच पास होने के बाद उसकी इच्छा पूरी करने के लिए उसे हाटा के इस विद्यालय में संस्कृत पढ़ने के लिए भेज दिया गया था। गोदावरी ने कहा कि आज उनका बच्चा उनके पास होता तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता। उन्होंने बताया कि वह काफी हंसमुख और चंचल था। उसके इसी स्वभाव की वजह से लोग काफी स्नेह करते थे। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधक स्कूल की कुछ कक्षाओं को हाॅस्टल की तरह उपयोग करते थे, जबकि उन्हें इसकी इजाजत नहीं थी।