संत कबीर ऊंचनीच, छुआछूत और आडंबरों के विरोधी थे। उन्होंने समाज से इन बुराइयों को समाप्त करने के लिए जीवन पर्यंत संघर्ष किया। उनका मानना था कि इस तरह की भावनाओं से सामाजिक एकता कमजोर होती है। इन्हें खत्म किए बिना सशक्त समाज की स्थापना संभव नहीं है।
ये बातें बक्सर से आए बुद्धिराम साहिब ने कहीं। वह सोमवार की रात तमकुहीरोड कस्बे में आयोजित तीन दिवसीय कबीर सत्संग समारोह के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बुराइयों के प्रति अपने आलोचनात्मक स्वभाव के कारण संत कबीर हमेशा आडंबरवादियों के निशाने पर रहे, लेकिन उन्होंने कभी संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा।
इसके पहले सत्संग में शामिल अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित किया और उसके बाद गुरु आरती से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। बक्सर से आए जीराम साहिब, कामेश्वर, महराजगंज के ज्ञानी, रमन, नंदलाल, पडरौना की उर्मिला देवी और बालदेव ने गुरु महिमा पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस दौरान कार्यक्रम के आयोजक राजेश दास, प्रहलाद केसरी, रणबीर प्रताप शाही, लक्ष्मण सिंह, अमर चंद्र जायसवाल, सुरेश मद्धेशिया, गनेश प्रसाद, दीनानाथ मिश्र, नंदलाल यादव, बृजबिहारी वर्मा आदि लोग मौजूद थे।