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नाविक और गोताखोर होंगे प्रशिक्षित

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नाव से गंडक नदी पार करते ग्रामीण। - फोटो : KUSHINAGAR
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नाविक और गोताखोर होंगे प्रशिक्षित
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पडरौना। नदियों के किनारे अब भी आवागमन का प्रमुख साधन नाव ही है, लेकिन अधिकांश नाव पुरानी हैं। नाविकों को भी प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। गोताखोर भी चिह्नित नहीं हैं। इसके चलते नदी में नाव दुर्घटना के मामलों पर नियंत्रण व हादसों के वक्त तत्काल राहत व बचाव कार्य शुरू करने में दिक्कत आती है। इसे देखते हुए सरकार ने नाव सुरक्षा एवं नाविक कल्याण योजना की शुरुआत की है। इसके तहत नाविकों के साथ-साथ गोताखोरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस पर निगरानी के लिए जिला व तहसील स्तर पर नाविक कल्याण समितियों का गठन किया गया है।
खड्डा, पडरौना व तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के करीब 100 गांव गंडक नदी के किनारे हैं। खड्डा क्षेत्र के भैंसहा व पनियहवा घाट पर नियमित तौर पर नाव चलती है। जटहां बाजार क्षेत्र में कटाई भरपुरवा गांव के लोग भी नाव से नदी पार कर खेतों में जाते हैं। बरवापट्टी, सेवरही और तरयासुजान थानाक्षेत्रों में भी तमाम लोग नाव से गंडक नदी को पार करने के लिए नाव का सहारा लेते हैं। नाविकों को पहले कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। नाव दुर्घटना होने पर नाविक व अगल-बगल के गांवों के अच्छे तैराक ही गोताखोर के तौर पर लोगों की जान बचाने का प्रयास करते हैं। हर साल बरसात के दिनों में नाव दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसे देखते हुए शासन ने नाविकों के प्रशिक्षण, नाव की मरम्मत व गोताखोर चिह्नित करके उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए नाव सुरक्षा एवं नाविक कल्याण योजना शुरू की है। इसके जरिए अभियान चलाकर नाविकों व गोताखोरों केे चिह्नित किया जाना है। इसके बाद इन्हें आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता व तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में नाविक कल्याण समिति का गठन किया गया है। समितियों को हर साल बरसात से पूर्व नदी के किनारे बसे गांवों में वृहद पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। यह समिति गोताखोरों का पूर्ण विवरण रखेगी, जिससे कि आपदा के वक्त इनकी तत्काल सहायता ली जा सके। एसडीएम खड्डा अरविंद कुमार ने बताया कि खड्डा तहसील के लिए उनकी अध्यक्षता में नाविक कल्याण समिति का गठन किया जा चुका है। फरवरी से विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत नाविकों व गोताखोरों की सूची बनाने से लेकर उनकी नाव की वर्तमान स्थिति व मरम्मत आदि का विवरण तैयार किया जाएगा।
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योजना के क्रियान्वयन से होगा विशेष लाभ
विरवट कोन्हवलिया गांव के नाविक योगेंद्र निषाद का कहना है कि सरकार का यह कदम बेहतर परिणाम देगा। सरकारी सहायता मिलने से अब काम को और बढ़िया बनाया जा सकेगा।
नाविक सहदेव चौहान का कहना है कि तमाम सुविधा के बावजूद नदी के किनारे बसे लोगों के लिए नाव ही सबसे बड़ा सहारा है। नाव की मरम्मत के लिए आर्थिक सहयोग मिले तो काम और बेहतर हो सकता है। ग्रामीण संजय सिंह पटेल का कहना है कि नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों के लिए नाव की यात्रा जीवन का अनिवार्य हिस्सा ही है। खेती और नदी के दूसरी तरफ बसे गांवों में रिश्तेदारी में जाने के लिए भी नाव ही सबसे बड़ा आसरा है। गौतम कुमार का कहना है कि नाविक और गोताखोर प्रशिक्षित होंगे तो हादसों की संख्या में कमी आने के साथ ही बचाव कार्य में भी तेजी आएगी।
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कुछ बड़ी नाव दुर्घटनाएं
2020 में विरवट कोन्हवलिय गांव के पास नाव दुर्घटना में बिहार निवासी अजीज मियां की मौत हो गई थी, 2018 में बाक खास गांव के सामने गंडक नदी में नाव पलट गई थी। नाव में सवार सभी लोग खेत से वापस लौट रहे थे। बड़ी मुश्किल से लोगों को बचाया गया, 2014 विरवट कोन्हवलिया गांव के सामने गंडक नदी में नाव पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।, 2008- जवहीं मलहीं गांव के सामने नाव पलटने से तीन लोगों की मौत हो गई थी।
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