कसया। देश की आजादी के साथ ही बनकर तैयार हुई कसया हवाई पट्टी को एक दशक से अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के तौर पर विकसित करने की कवायद चल रही है। करीब 40 वर्षों तक उपेक्षित रही इस हवाई पट्टी पर वर्ष 1995 में मुख्यमंत्री मायावती की नजर पड़ी थी। तब से लेकर अब तक कई शिलान्यास हो चुके हैं। पिछले दिनों लखनऊ में हुए यूपी इन्वेस्टर्स मीट में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब इसी वर्ष यहां से उड़ान शुरू होने की आस जगी है। हालांकि विमान सेवा शुरू होने से काफी पहले एक बार फिर इसके निर्माण का श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है।
भलुही मदारीपट्टी गांव में वर्ष 1946 में ब्रिटिश हुकूमत ने ऐरोड्रम (हवाई पट्टी) निर्माण के लिए करीब 650 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर निर्माण कार्य शुरू कराया था। इसके लिए पडरौना रेलवे स्टेशन से कसया हवाई पट्टी तक रेल लाइन भी बनाई गई थी। दो वर्ष में ही एरोड्रम बनकर तैयार भी हो गया लेकिन सत्ता परिवर्तन के चलते इसका कोई उपयोग नहीं हुआ। वर्ष 1954 में बुद्घ पूर्णिमा के अवसर पर कुशीनगर में दुनिया भर के बौद्घ धर्म के अनुयायी जुटे थे। उसमें श्रीलंका, म्यांमार समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष व अन्य प्रमुख लोग भी पहुंचे थे। पहली बार हवाई पट्टी का उपयोग विमान उतारने के लिए हुआ। परंतु इसके बाद फिर किसी ने हवाई पट्टी की सुधि नहीं ली। अगल-बगल के गांवों के लोग हवाई पट्टी पर फसलों की मड़ाई करते थे। बच्चे खेलते थे और साइकिल चलाना भी इसी पर सीखते थे। हवाई पट्टी को सीधे पार करते हुए कसया-रामकोला पिच मार्ग का भी निर्माण हो गया।
करीब चार दशक बाद पांच सितंबर 1995 को प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने हवाईपट्टी के कुशीनगर के महत्व को देखते हुए कसया हवाई पट्टी के जिर्णोद्घार की घोषणा की। यहां उनके नाम का शिलापट्ट आज भी उसकी गवाही दे रहा है। इसके बाद 10 अक्टूबर 1995 को तत्कालीन केंद्रीय नागर विमानन और पर्यटन मंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी हवाईपट्टी के लिए टर्मिनल बिल्डिंग का शिलान्यास किया था। टर्मिनल बिल्डिंग तीन वर्ष के भीतर बनकर तैयार हुआ और दो रडार भी लगाए गए। परंतु विमानों का नियमित उड़ान शुरू नहीं हुआ।
वर्ष 2008 में फिर तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने बजट सत्र में कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट की बात रखी। मार्च 2010 में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का अध्यादेश भी जारी हो गया परंतु किसानों के विरोध के चलते कार्य रुक गया।
प्रदेश में वर्ष 2012 में सत्ता आई सपा सरकार में कुशीनगर इंटर नेशनल एयरपोर्ट के प्रस्ताव पर कार्य शुरू कराया। जमीनों का अधिग्रहण करने के साथ ही निर्माण के लिए बजट की व्यवस्था की गई। परंतु इसके निर्माण के लिए कंपनियां तैयार नहीं हो रही थीं। प्रदेश सरकार के लगातार प्रयास के बाद अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के मानक के मुताबिक कसया हवाई पट्टी को विकसित करने के लिए राइट्स कंपनी तैयार हुई और उसे 199 करोड़ रुपये का यह ठेका मिला। तीन अप्रैल 2016 को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट निर्माण के लिए तत्कालीन डीएम लोकेश एम और जिले के नवागत डीएम शंभू कुमार ने एक साथ भूमि पूजन में हिस्सा लिया।
पिछले महीने लखनऊ में हुए यूपी इन्वेस्टर्स मीट के दौरान मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने कुशीनगर इंटर नेशनल एयरपोर्ट से जल्दी उड़ान शुरू करने का दावा किया तो अचानक से यहां भी सरगर्मी बढ़ गई। हालांकि अभी भी कई जगह निर्माणाधीन एयरपोर्ट की बाउंड्रीवॉल का काम बाकी है। अधिग्रहित एरिया के भीतर कुछ धार्मिक स्थल, स्कूल व अन्य निर्माण हटवाना बाकी है। परंतु अफसर लगातार एयरपोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं। कार्यदाई संस्था भी शीघ्र निर्माण पूरा होने की बात कह रही है। लोगों को उम्मीद है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कुशीनगर के लोगों का एक बड़ा सपना पूरा हो सकता है।