पडरौना। इस लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण को साधने के लिए सभी दल रणनीति बनाकर काम कर रहे थे। खासकर, सैंथवार और कुर्मी वोटों के बिखराव को रोकने के लिए भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद आरपीएन सिंह के कंधों पर जिम्मेदारी दे दी थी। आरपीएन ने इस जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए दर्जनों बार हाटा में गोपनीय तरीके से बैठकें कर भाजपा के पक्ष में सैंथवार और कुर्मी मतदाताओं को जोड़ने का काम किया। यही वजह है कि भाजपा को हाटा के मतदाताओं ने घाटा से निकाल लिया है।
हाटा विधानसभा क्षेत्र में सैंथवार मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है। संसदीय क्षेत्र में यह वोटर निर्णायक की भूमिका में होते हैं। कांग्रेस में रहते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह जब-जब चुनाव लड़े, उन्हें हर बार हाटा से बड़ी संख्या में मत मिलते रहे। साल 2009 में जब वे पहली बार सांसद चुने गए तो उनकी जीत में हाटा विधानसभा के मतदाताओं का बड़ा योगदान था। सैंथवार-कुर्मी वोटरों की संख्या को देखते हुए ही इस लोकसभा चुनाव में इंडी गठबंधन ने अजय प्रताप सिंह उर्फ पिंटू सिंह सैंथवार को मैदान में उतारकर भाजपा को घेरने की कोशिश की थी। मगर, गठबंधन का यह दांव उल्टा पड़ गया। भाजपा ने सैंथवार-कुर्मी वोटरों को सहेजने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री व राज्यसभा सांसद आरपीएन सिंह को जिम्मेदारी दे दी। आरपीएन सिंह दिनभर लोकसभा क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में प्रचार-प्रसार करते थे और रात में हाटा विधानसभा क्षेत्र में पहुंच बैठकें कर वोटरों को भाजपा के पक्ष में जोड़ते रहे। मंगलवार को परिणाम आने के बाद भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली और हाटा ने सभी विधानसभाओं की भरपाई करते हुए भाजपा को जीत दिला दी।