खड्डा। गंडक नदी पार बसे बाढ़ प्रभावित गांवों में दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सोहगीवरवा-नौरगिया (बिहार) मार्ग के बीच से गुजरने वाला रोहुआ नाला उफनाने से नदी पार के गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया है। ग्रामीण पानी के बीच से होकर अथवा छोटी नाव के सहारे आने-जाने को मजबूर हैं। हालांकि, छितौनी तटबंध पर फिलहाल नदी का दबाव न के बराबर होने से राहत है। अफसर सिर्फ सुविधा मिलने का दावा कर रहे हैं, नदी उस पार जलभराव होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रोहुआ नाला उफनाने का असर खड्डा विकासखंड के मरचहव, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर और नरायनपुर के अलावा महराजगंज जिले के निचलौल विकासखंड के सोहगीवरवा, बरवा समेत आसपास के गांवों पर पड़ा है। इन गांवों में करीब 60 हजार की आबादी रहती है। ग्रामीणों को बैंक, ब्लॉक, तहसील और अन्य जरूरी काम के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। गंडक नदी का डिस्चार्ज मंगलवार सुबह आठ बजे 1.09 लाख क्यूसेक और शाम चार बजे 1.044 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया। भैंसहा गेज स्थल पर नदी का जलस्तर 94.90 मीटर रहा, जो चेतावनी बिंदु से करीब 10 सेंटीमीटर नीचे है। नदी का जलस्तर फिलहाल चेतावनी बिंदु से नीचे होने के बावजूद रोहुआ नाला उफनने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। नदी पार के गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। रविवार को न्यू पीएचसी शिवपुर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और ग्रामीणों को दवाएं वितरित कीं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की आबादी और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ जलजनित बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है।
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सड़कों के गड्ढों में पानी, जहरीले जीव-जंतुओं का डर
-गांवों के आसपास सड़कों पर बने गड्ढों में पानी भर जाने से पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया है। पानी के कारण जहरीले जीव-जंतुओं के निकलने का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीण विनोद, नंदू, जानकी और पुरुषोत्तम ने बताया कि गांवों में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचना राहत की बात है, लेकिन आवागमन, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरी सुविधाओं की समस्या जस की तस बनी हुई है।