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Kushinagar News: परिचालकों की कमी से जूझ रहा रोडवेज बस डिपो

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रोडवेज की बसों में कंडक्टर कम होने से डिपो में खड़ी रहती हैं अधिकांश बसें। - फोटो : KUSHINAGAR
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परिचालकों की कमी से जूझ रहा रोडवेज बस डिपो
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- स्वीकृत पदों के सापेक्ष परिचालकों की संख्या है कम
- 88 के सापेक्ष 53 परिचालक हैं पडरौना बस डिपो में
पडरौना। बस डिपो के बने दस वर्ष गुजर गए, इसके बावजूद परिचालकों की संख्या में अपेक्षा के अनुरूप वृद्धि नहीं हो सकी है। इस डिपो में परिचालकों की संख्या काफी कम है। इस वजह से रोडवेज बसों के फेरों में समस्या आती है।
पडरौना बस स्टेशन को वर्ष 2012 में डिपो का दर्जा मिला था। उस समय 21 बसें संचालित होती थीं। अब यहां रोडवेज बसों की संख्या बढ़कर 38 हो गई है। इसमें 21 परिवहन निगम तथा 17 अनुबंधित बसें हैं। डिपो बनने के दस वर्षों बाद भी यहां यात्रियों के लिए अपेक्षित सुविधाएं नहीं बढ़ पाई हैं। न शुद्ध पेयजल की व्यवस्था है और न ही यात्रियों के बैठने का बेहतर इंतजाम। जिस भवन में बस स्टेशन संचालित होता है, वह काफी जर्जर हो गया है। इस वजह से कर्मचारी यहां बैठने से कतराते हैं। अधिकतर कर्मचारी एक किलोमीटर दूर बने वर्कशॉप में बैठते हैं। पूरे बरसात भर इस बस स्टेशन में कोई यात्री नहीं आता है, क्योंकि बारिश के कारण यह परिसर तालाब में तब्दील हो जाता है।
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बस डिपो की समस्या यहीं तक नहीं है। बसों के संचालन में भी दिक्कतें आ रही हैं। इस डिपो के अंतर्गत परिचालकों के 88 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनके सापेक्ष 53 परिचालक ही उपलब्ध हैं। इनमें आठ स्थायी और बाकी संविदा पर कार्यरत हैं
यात्रियों को मिलती है क्षतिपूर्ति
रोडवेज के एआरएम बताते हैं कि रोडवेज की बसों में बैठे यात्रियों के साथ दुर्घटना में क्षतिपूर्ति की व्यवस्था है। यदि यात्री की मौत हो जाए तो पांच लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल होने पर विभाग की ओर से 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है।
मुसाफिरों को होती है दिक्कत
परिचालकों की संख्या कम होने के कारण रोडवेज बसों के फेरे कम होते हैं, जिससे यात्रियों को बस स्टॉपों पर समय से बसें नहीं मिलतीं, वहीं स्टेशन पर भी यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ता है। इसका लाभ बोलेरो, निजी बस व अन्य वाहन चालक उठाते हैं। बसों का ज्यादा देर इंतजार करने के बजाय यात्री इन वाहनों से गंतव्य के लिए बढ़ जाते हैं।
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रोडवेज बसों में वर्ष 2016 के नार्म्स के मुताबिक 2.16 के अनुपात में परिचालकों की तैनाती की जाती है। इस समय 88 के सापेक्ष 53 परिचालक उपलब्ध हैं, जिसमें आठ स्थायी हैं। परिचालकों की संख्या कम होने के कारण बसों के फेरे कम लग पाते हैं। स्वीकृत पदों के सापेक्ष परिचालकों की नियुक्ति की मांग की गई है।
बिंदू प्रसाद, एआरएम, रोडवेज
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