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वल में डैमेज कंट्रोल करने में विफल हैं राइस मिलेंचा

Sun, 13 Nov 2016 11:11 PM IST
kushinagar
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पडरौना। जिले की धान खरीद एजेंसियां साफ-सुथरे, अच्छी तरह से सुखाए गए और बेहतर किस्म का धान न लाने पर किसानों को लौटा देती हैं। उनका तर्क होता है कि इस तरह के धान से बढ़िया चावल नहीं बनेगा, लेकिन जनपद में संचालित होने वाली 56 औद्योगिक राइस मिलों में सिर्फ दो ही ऐसी हैं, जो एफसीआई के मानक पर खरा उतरने के लायक चावल का उत्पादन करने की दशा में हैं। सोटेक मिलें न होने के कारण डैमेज चावल की भरमार होती है। पिछले सत्र में एफसीआई ने जनपद के मिलरों का करीब 50 हजार क्विंटल चावल इसी वजह से वापस कर दिया था।
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पडरौना, नेबुआ नौरंगिया, खड्डा, सुकरौली, हाटा, मोतीचक, फाजिलनगर, कप्तानगंज सहित विभिन्न ब्लॉकों में औद्योगिक राइस मिलें स्थापित हैं, जिनकी कुल संख्या 56 है। खाद्य एवं विपणन विभाग की मानी जाए तो इनमें सिर्फ बोदरवार और फाजिलनगर में स्थापित राइसमिल ही साफ-सुथरा चावल उत्पादन करने के योग्य हैं। इनके यहां चावल में टूटन, डैमेज आदि की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि इनके विपरीत अन्य मिलरों के यहां डैमेज चावल चार से पांच प्रतिशत और टूटन की मात्रा भी अधिक होती है। चूंकि भारतीय खाद्य निगम तीन प्रतिशत से अधिक डैमेज चावल नहीं लेता, इस कारण इनके यहां तैयार चावल अक्सर रिजेक्ट हो जाता है। 

ज्यादातर राइसमिलों में नहीं है सोटेक, ट्रेडर और ट्रायर
डिप्टी आरएमओ की मानें तो जनपद में केवल दो ही राइसमिलें एफसीआई के मानक पर खरा उतरने लायक चावल तैयार कर पाती हैं। अन्य सभी पुरानी तकनीक पर आधारित हैं। उनका कहना था कि सोटेक राइसमिलों में चावल अच्छी तरह छांटने की सुविधा होती है। जिन मिलों में ट्रेडर और ट्रायर की सुविधा होती है, वहां भी खराब चावल आसानी से अलग हो जाता है।
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कोट
जनपद की इन औद्योगिक राइस मिलों की पुरानी टेक्नोलॉजी की होने के कारण चावल में गुणवत्ता नहीं आ पाती। इससे चावल में 15 प्रतिशत से अधिक नमी, 25 प्रतिशत से अधिक टूटन और तीन प्रतिशत से ज्यादा डैमेज की मात्रा रह जाती है। इस तरह का चावल एफसीआई एक्सेप्ट नहीं करता। पिछले साल एफसीआई ने करीब 50 हजार क्विंटल चावल मिलरों को लौटा दिया था, जिसे उन्हें दूसरी मिलों में साफ कराना पड़ा।
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-निश्चल आनंद, डिप्टी आरएमओ।
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