तमकुहीरोड। मानसून सत्र को लेकर नरवाजोत बांध को बड़ी गंडक नदी के कटान से बचाने के लिए किमी 1.700 पर बाढ़ खंड विभाग की ओर से पांच करोड़ 83 लाख 56 हजार की लागत से बाढ़ बचाव का कार्य चल रहा है। इस कार्य को मानसून आने से पहले पूरा करना चुनौती है। 15 जून तक अगर यह काम पूरा नहीं हो पाया तो जलस्तर में वृद्धि होने के बाद नदी तेवर में आएगी और फिर कटान शुरू हो जाएगा।
नरवाजोत बांध की सुरक्षा के लिए बाढ़ खंड विभाग सेवरही की ओर से बाढ़ बचाव कार्य तेजी से कराया जा रहा है। इसमें शासन की ओर से स्वीकृत पांच करोड़ 83 लाख 56 हजार की लागत से किमी 1.700 पर ठोकर निर्माण के साथ डाउन स्ट्रीम में परक्यूपाइन का निर्माण कराया जाना है। यहां के लोगों की मानें तो यह ठोकर पिछले कई सालों से वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े जा रहे अत्यधिक पानी के चलते काफी जर्जर हो चुका है। तीन साल पहले जब गंडक नदी में साढ़े तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया था तो नदी ने इस ठोकर को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। इससे ठोकर पर झोपड़ी बना कर रह रहे लोगों में अफरा-तफरी मच गई थी और लोगों को अपनी झोपड़ी हटाने के लिए विवश होना पड़ा था। बांध की सुरक्षा के साथ पिपराघाट के नरवाजोत, भंगी टोला, दहारी टोला, तवक्कल टोला, शिव टोला, देवनारायण टोला, चौकी टोला, उपाध्याय टोला, हनुमान टोला, मुसहरी टोला आदि गांवोंं पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया था। इसी खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं के प्रस्ताव पर शासन ने इसके पुनर्निर्माण की मंजूरी दी है और निर्माण कार्य जारी है। क्षेत्र के रामायण राय, दूधनाथ शर्मा, पुजारी सिंह, ध्रुव निषाद आदि कहना है कि इस बांध व ठोकर की मजबूती पर ही पिपराघाट के कई गांवों की सुरक्षा निर्भर करती है। यदि इस कार्य को 15 जून के पहले पूरा नहीं कराया गया तो उसके बाद कभी भी खतरे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और बांध के साथ कई गांवों की सुरक्षा पर भी संकट मंडरा सकता है। इन लोगों ने बाढ़ बचाव कार्य में तेजी लाकर निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कराए जाने की मांग की है। इस संबंध में जेई रमेशधर दुबे का कहना है कि विभाग बांध की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और निरंतर बचाव कार्य में जुटा हुआ है। हर हाल में निर्धारित समय सीमा के पहले ही कार्य को पूरा करा लिया जाएगा।