सेवरही के रामजानकी मंदिर में श्रीराम कथा का रसपान कराते आचार्य सरलजी महाराज।
तमकुहीरोड। रामचरित मानस पाप पर पुण्य की विजय गाथा का प्रतीक है। यह राम-रावण के कथा का संग्रह नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति को सन्मार्ग व भलाई के रास्ते पर चलने का प्रेरणास्रोत है। विद्वान व बलशाली होते हुए रावण इसलिए हार गया कि वह सन्मार्ग व भलाई के रास्ते से भटक गया था।
ये बातें कथा वाचक सरल जी ने कहीं। वे शनिवार की रात सेवरही के रामजानकी मंदिर में श्रीराम कथा सुना रहे थे। उन्होंने राम वनवास, केवट राम संवाद, सीता हरण आदि प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि कैकेयी ने तो उन्हें 14 वर्ष का ही वनवास दिया था। लेकिन विदेशी आक्रांताओं के कारण कलयुग में भगवान श्रीराम को पांच सौ साल बाद अयोध्या में लौटना पड़ा है। उन्होंने सभी लोगों से प्राण प्रतिष्ठा के दिन भजन-कीर्तन, हनुमान चालीसा, सुंदर कांड आदि का पाठ करने की सलाह दी। इसके पहले चेयरमैन सोनिया जायसवाल, ईओ रवि पटेल, पूर्व चेयरमैन त्रिभुवन जायसवाल, मायाशंकर निर्गुणायत, मक्खन जायसवाल आदि ने राम चरित मानस ग्रंथ की आरती उतार कर पूजा अर्चना की।