संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। गंडक नदी के डिस्चार्ज में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे बांध के किनारे बसे गांवों के लोग चिंतित हो रहे हैं। रविवार को गंडक का डिस्चार्ज 50 हजार क्यूसेक रहा। इससे नरवाजोत से लगायत अहिरौलीदान तक नदी कई जगहो ठोकरों (स्परों ) से सटकर बहने लगी है। लोग डिस्चार्ज बढ़ने पर तटबंध के क्षतिग्रस्त ठोकर टूटने की आशंका से चिंतित हैं।
सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक 17 किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। इस समय गंडक नदी के डिस्चार्ज में वृद्धि हो रही है। शनिवार को नदी का डिस्चार्ज 38 हजार क्यूसेक से बढ़कर 50 हजार क्यूसेक हो गया। इसके चलते गंडक नदी, अब ठोकरों से सटकर बहने लगी है। आशंका यह भी है कि जब नेपाल की पहाड़ियों पर मानसूनी बारिश शुरू होगी, तो यह डिस्चार्ज काफी बढ़ सकता है।
पिछले साल वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में चार लाख बारह हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ने पर यूपी क्षेत्र के साथ बिहार में बहने वाली गंडक नदी उफान पर आ गई थी। तटबंध के किनारे बसे बिनटोली, घघवा जगदीश, चैनपट्टी, विरवट कोंन्हवलिया, बाक खाश, बाघाचौर, नोनियापट्टी आदि गांव के लोगों की चिंता बढ़ गई है।
बाढ़ व कटान के खतरे से चिंतित जिला पंचायत सदस्य शर्मा यादव, पिपराघाट के ग्राम प्रधान रामाजी निषाद, विरवट कोंन्हवलिया के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आनंद कुमार सिंह, जवही दयाल के ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल, बुटाई निषाद, प्रभुनाथ यादव, मथुरा सिंह, बृजकिशोर साहनी, संजय सिंह आदि ने कहा कि यदि शीघ्र परियोजना के कार्यों को पूरा कराकर अन्य संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो गंडक का डिस्चार्ज बढ़ने पर तटबंध के क्षतिग्रस्त ठोकर क्षेत्र की तबाही का कारण बन सकती है।
इस संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ रमेश यादव ने बताया कि बचाव कार्य अंतिम दौर में है। सभी संवेदनशील जगहों की निगरानी बढ़ा दी गई है।