एक हेक्टेयर खेत में धान की बुआई करने में आती है 12,500 रुपये लागत, होती है करीब 20 क्विंटल पैदावार
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। अप्रैल से जून तक पड़ने वाली तपती गर्मी में जिले की मिट्टी में अच्छे धान की पैदावार हो सकती है। इसके लिए जिले की मिट्टी शत-प्रतिशत उपयुक्त है। फाजिलनगर ब्लॉक क्षेत्र के एक किसान ने इसे साबित कर दिखाया है। उन्होंने बीते मार्च में अपने खेत में धान की नर्सरी गिराकर अप्रैल के प्रथम सप्ताह में करीब 20 डिस्मिल खेत में इसकी बुआई की थी। उनका धान अब पक कर तैयार हो गया है। एक-दो दिन में वे इस धान की मड़ाई करेंगे।
फाजिलनगर ब्लाॅक के लवकुश गांव निवासी किसान हरेराम सिंह मार्च के प्रथम सप्ताह में मुरादाबाद के रामपुर किसी कार्य से गए थे। वे वहां किसानों को धान की बेेहन गिराते देखा। उत्सुकतावश उन्होंने उसके बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद वहां से हाइब्रिड सरवती धान का बीज लेकर गांव पहुंचे। वह सरसों की मड़ाई के बाद खाली पड़े खेत में आठ जुलाई को इसकी बेहन गिराए। नर्सरी तैयार होने के बाद उन्होंने 14 अप्रैल को प्रयोग के तौर पर 20 डिस्मिल खेत में धान की रोपाई कर दी। उन्होंने बताया कि नर्सरी लगाने के समय किसी उर्वरक का प्रयोग नहीं किया। धान की फसल एक माह की हुई तो आठ किलोग्राम ग्राम यूरिया और अगले माह भी आठ किलोग्राम यूरिया का छिड़काव किया। इसके अलावा इस धान में अन्य कीटनाशक दवाओं का प्रयोग नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि धान की फसल पक कर तैयार है। कुछ ही दिन में उसकी मड़ाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि बीस डिस्मिल में करीब चार क्विंटल पैदावार होने की संभावना है।
इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के प्रभारी डॉ. अशोक राय ने कहा कि रवि, खरीफ और जायद की फसल के लिए मौसम की भूमिका महत्वपूर्ण है। कुछ कम्पनियों के हाइब्रिड बीज से मार्च-अप्रैल माह में भी धान की फसल तैयार की जा सकती है। लेकिन व्यावसायिक दृष्टि से यह पांच प्रतिशत ही सम्भव है।
एक हेक्टेयर में हो सकती है 20 क्विंटल पैदावार
किसान हरेराम ने बताया कि मुरादाबाद जिले के रामपुर के किसानों ने बताया कि इस हाइब्रीड सरवती धान की पैदावार करीब एक हेक्टेयर में 20 क्विंटल है। उन्होंने बताया कि इस धान की बुआई में 12,500 रुपये लागत आएगी। इस धान की सबसे बढि़या खूबी यह है कि गर्मी के मौसम में होने से इसमें कीटनाशक दवाओं का प्रयोग बहुत ही कम होता है। गोबर की खाद और जरूरत के मुताबिक यूरिया का प्रयोग किया जा सकता है।