लर्निंग लाइसेंस के लिए 350 रुपये और स्थायी लाइसेंस के लिए 1000 रुपये निर्धारित है विभागीय शुल्क
ऑनलाइन और अधिवक्ता शुल्क के नाम पर लोगों को देना पड़ता है तीन सौ से पांच रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए शासन की तरफ से भले ही दर निर्धारित कर दिया गया हो, लेकिन लोगों को उससे अधिक रुपये देने पड़ते हैं। लर्निंग लाइसेंस तो लोगों को ऑनलाइन मिल जाता है, लेकिन स्थायी लाइसेंस के लिए बिना ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर बिना वाहन चलाए लाइसेंस जारी नहीं होता है। हैवी ड्राइविंग लाइसेंस ड्राइविंग स्कूल के प्रमाण पत्र के आधार पर विभाग वाहन चालकों को जारी करता है।
बृहस्पतिवार की दोपहर करीब 12 बजे एआरटीओ कार्यालय की अमर उजाला ने लाइव किया। इस दौरान कार्यालय परिसर में बने ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के पास करीब 20 लोग ट्रैक पर वाहन चलाने के लिए खड़े थे। विभाग के आरआई आरडी प्रसाद वर्मा ट्रैक पर वाहन चलाने वाले चालकों की निगरानी कर रहे थे, जबकि वरिष्ठ लिपिक हर्षवर्धन सिंह उनकी सहायता में लगे थे।
आरआई ने बताया कि लर्निंग लाइसेंस काफी पहले से ऑनलाइन बन रहा है। इसकी परीक्षा भी ऑनलाइन ही होती है। परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद संबंधित को उनके घर पर डाक से लाइसेंस चला जाता है। इसके लिए किसी भी सहज जन सेवा केंद्र से 350 रुपये शुल्क जमा कर आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि स्थायी लाइसेंस के लिए एक हजार रुपये ऑनलाइन शुल्क जमा करना होता है। ऑनलाइन शुल्क जमा करने पर ट्रैक पर वाहन चलाने के लिए तिथि मिल जाती है। निर्धारित तिथि को कार्यालय परिसर में बने ट्रैक पर वाहन चलाना होता है।
आरआई ने बताया कि ट्रैक पर वाहन चलाते समय चालक का संतुलन, सुरक्षा जैसे हेलमेट या सीटबेल्ट, यातायात नियमों का पालन, इंडिकेटर का प्रयोग, वाहन नियंत्रण क्षमता, वाहन खड़ा करने का तरीका, ब्रेक और क्लच का अनुपात और वाहन के बारे में प्राथमिक जानकारी समेत अन्य बिंदुओं पर निगरानी की जाती है। इसमें जो वाहन चालक सफल होता है, उन्हीं का स्थायी लाइसेंस जारी होता है।
उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को कुल 64 लोगों ने ट्रैक पर वाहन चलाया है। इसमें से चार लोग फेल हो गए हैं, शेष वाहन चालक ट्रैक पर वाहन चलाने में सफल रहे हैं।
ट्रेनिंग स्कूल से मिले प्रमाण पत्र के आधार पर जारी होता है हैवी लाइसेंस
आरआई आरडी प्रसाद वर्मा ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मोटर ट्रेनिंग स्कूल में हैवी लाइसेंस लेने वाले लोगों को 30 दिन का प्रशिक्षण लेना पड़ता है। प्रशिक्षण पूरा करने पर ट्रेनिंग स्कूल संचालक उन्हें प्रमाण पत्र देते हैं। इसके अलावा विभाग के समझा प्रशिक्षु चालक की उपस्थिति पंजिका समेत अन्य प्रपत्र उपलब्ध कराते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हैवी लाइसेंस के आवेदक का प्रमाण पत्र सही है। इसके बाद प्रशिक्षण प्रमाण पत्र के आधार पर संबंधित को हैवी लाइसेंस जारी कर दिया जाता है।
कोट
करीब तीन माह पहले लर्निंग लाइसेंस बनवाया था। उस समय एक सहज जन सेवा केंद्र पर ऑनलाइन परीक्षा दी थी। विभाग का ऑनलाइन शुल्क समेत अन्य शुल्क के रूप में केंद्र संचालक ने पांच सौ रुपये लिए थे।
-शहाबुद्दीन, निवासी बढ़या छापर
स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए एक अधिवक्ता ने विभागीय शुल्क समेत अन्य खर्च के नाम पर 1400 रुपये लिए थे। इसके अलावा कोई शुल्क नहीं दिया हूं।
- विक्की कुमार, निवासी फुलवरिया।
पिता जी ने शुल्क जमा किया था। तिथि निर्धारित आने पर केवल ट्रायल देने कार्यालय आया हूं। कितने रुपये लगे हैं, इसके बारे में जानकारी नहीं है।
-सिपेंद्र गुप्ता, निवासी कुदूर
लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 350 रुपये सरकारी शुल्क ऑनलाइन जमा करना होता है। जो ऑनलाइन करता है वह 50 से सौ रुपये लेता है। इसके अलावा फाइल व अधिवक्ता शुल्क के नाम पर एक व्यक्ति से करीब पांच रुपये लिए जाते हैं। इसी तरह स्थायी ड्राइविंग के लिए एक हजार रुपये सरकारी शुल्क है। इसे भी ऑनलाइन जमा करना पड़ता है। ऑनलाइन करने वाला सीएससी संचालक सौ रुपये लेते हैं। इसके बाद फाइल और अधिवक्ता शुल्क के नाम पर दो सौ तीन सौ रुपये लिया जाता है।
- धीरेंद्र मोहन सहाय, अधिवक्ता