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प्रसूताओं को नहीं मिल रहा भोजन और नाश्ता

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प्रसूताओं को नहीं मिल रहा भोजन और नाश्ता
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हाटा (कुशीनगर)। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों पर प्रसूताओं के लिए चलाई जा रही योजनाएं सिर्फ कागजों में ही संचालित हो रही हैं। सुविधा नहीं मिलने से प्रसूताओं के परिजन प्रसव के कुछ घंटे बाद ही उन्हें लेकर घर चले जाते हैं, जिससे डॉक्टरों की निगरानी में वह नहीं रह पाती हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग के नियम के मुताबिक प्रसव के बाद महिला को 48 घंटे तक प्रसव केंद्र के वार्ड में डॉक्टर की निगरानी में रखना होता है।
इस दौरान प्रसूताओं को नाश्ता, दूध और भोजन देने का प्रावधान है। इसके लिए जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से ठेकेदारों को नियुक्त किया गया है। हाटा सीएचसी के प्रसव केंद्र पर जननी शिशु सुरक्षा के तहत प्रसूताओं को दूध, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था बंद है। इस कारण प्रसव के बाद कोई प्रसूता अस्पताल पर रुकना नहीं चाहती हैं। विभाग की ओर से ठेकेदार को जारी किए गए कार्यादेश में तय मीनू के मुताबिक प्रसूताओं को नाश्ता और भोजन देने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन ठेकेदार और विभाग के जिम्मेदारों की मिलीभगत से भोजन और नाश्ते की व्यवस्था सिर्फ कागजों में चल रही है। आंकड़ों की बात करें तो 27 जून को इस केंद्र पर तीन महिलाओं का प्रसव हुआ था, जबकि 28 जून को छह महिलाओं का प्रसव हुआ, लेकिन 28 घंटे के भीतर मंगलवार को एक भी प्रसूता प्रसव केंद्र के वार्ड में नहीं पाई गई।
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ये है मीनू
अस्पताल में भर्ती प्रसूता को सुबह नाश्ते में 400 एमएल दूध, दो अंडे या फल, दोपहर के भोजन में चावल, दाल, रोटी, हरी सब्जी और सलाद, शाम के नाश्ते में ब्रेड और चाय, रात के भोजन में रोटी, सब्जी, दाल और चावल देना होता है।
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‘जल्द शुरू होगी सुविधा’
हाटा सीएचसी के प्रभारी डॉ. एलबी यादव ने बताया कि इस महीने से नए ठेकेदार को काम मिला है। अभी कार्य शुरू नहीं हुआ है। भोजन-नाश्ते की व्यवस्था शुरू करने के लिए संबंधित ठेकेदार को पत्र भेजकर निर्देशित किया जाएगा।
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