पडरौना/गुरवलिया बाजार। कुशीनगर पुलिस भले ही तस्करों का खाका तैयार कर उनके आकाओं पर कार्रवाई कर ले, इसके बावजूद मुखबिरी के इंतजार में बैठी पुलिस के आंखों में धूल झोंकते हुए पशु हो या शराब तस्कर पड़ोसी प्रांत बिहार के गोपालगंज में दाखिल हो जा रहे हैं। फिर वहां से दरभंगा, मुजफ्फरपुर में शराब तो बंगाल तक पशुओं को भेजा जा रहा है।
पिछले एक सप्ताह में यूपी-बिहार सीमा पर स्थित बलथरी चेकपोस्ट से लेकर पंचदेवरी, कटेया और विजयीपुर के इलाकों में ऐसे तस्कर पकड़े गए हैं, ये कुशीनगर जिले से प्रत्यक्ष ताल्लुक रखते हैं या गोरखपुर और अन्य इलाकों से होते हुए उनके तस्करी का रास्ता कुशीनगर रहा है। पशु तस्करी से लेकर शराब तस्करी के जो तरकीब है उससे कहीं न कहीं कुशीनगर पुलिस की तफ्तीश फीकी पड़ी है, क्योंकि इस पूरे तस्करी में युवाओं की गिरफ्तारी हुई है। पश्चिमी यूपी से आ रही पशुओं की खेप हो या हरियाणा,कुरुक्षेत्र के रास्ते आ रही शराब की खेप। इन दोनों में तस्करों का मुख्य रास्ता कुशीनगर का है, जहां से यह बिहार में विभिन्न रास्तों से होते हुए दाखिल होते हैं। बिहार में दाखिल होने के लिए यह स्थानीय तस्करों का भी साथ लेते हैं जो इनको मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते न ले जाकर लिंक सड़कों और पगडंडियों के रास्ते ले जाते हैं।
इधर नए साल में कुशीनगर पुलिस सख्त हुई तो तस्करों पर गैंगस्टर, गुंडा एक्ट और अन्य कार्रवाई की लेकिन इनका ध्यान मुख्य सड़कों से होने वाली तस्करी पर कम रहा। इससे पिछले एक सप्ताह में ऐसे कई तस्कर जिले के उस पार गोपालगंज के अलग अलग इलाकों में पकड़े गए जो तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के रहने वाले थे। इनमें कुछ कसया थाना क्षेत्र के भी तस्कर पकड़े गए।इसके अलावा पशुओं के साथ जो गिरफ्तारी हुई उसमें गोरखपुर के भी युवा चेहरे शामिल थे।
शनिवार को तो बलथरी चेकपोस्ट पर लगभग 250 लाख की शराब के साथ समस्तीपुर का तस्कर दीपू पकड़ा गया जो राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए तमकुही,बहादुरपुर के रास्ते बिहार की सीमा में दाखिल हो रहा था।सूत्रों के अनुसार यह तो महज गिरफ्तारी के डाटा हैं। इसके अलावा रोज भोर और रात के अंधेरे में आगे-आगे लग्जरी गाड़ियों के साथ पिकअप,डीसीएम और ट्रैक्टर ट्रालियां बिहार के दाखिल होती हैं जिन पर शराब और पशु लदे होते हैं।