पडरौना। साइबर ठगों को जेल भेजने के बाद पुलिस उनके संपर्क के कुछ और लोगों की कुंडली खंगालने में जुट गई है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में भी कुछ अन्य नाम के खुलासे की संभावना है। पकड़े गए चारों ठग लोगों को बहलाकर बैंक खातों के माध्यम से चीनी गेमिंग ऐप में निवेश के लिए प्रेरित कर ठगी को अंजाम देते थे। हालाकि देखा जाय तो यह ठगी का पहला मामला नहीं है। पूर्व में कम उम्र के लड़के अलग-अलग तौर तरीकों से जालसाजी करते पकड़े गए हैं। पुलिस में सलेक्शन के नाम पर तीन माह तक बंद हुए सिम के माध्यम से ठगी और पिछले कुछ वर्षों में तमकुहीराज व पड़ोसी राज्य बिहार के इलाकों में अंतरराज्यीय साइबर गैंग का पर्दाफाश हो चुका है। खड्डा पुलिस, साइबर सेल और स्वाट टीम ने मंगलवार की अंतरराज्यीय साइबर ठगी गैंग का पर्दाफाश किया। इस मामले में जेल गए आरोपियों के अलावा इनके संपर्क में रहने वाले अन्य लोगों की तलाश पुलिस ने शुरू की है। संभव है कई और चेहरों से पर्दा उठेगा। सूत्रों के अनुसार जब प्रवर्तन निदेशालय के एक्टिव होने के बाद जांच का दायरा भी बढ़ेगा। कुशीनगर जिला और यहां के सीमावर्ती इलाके शुरू से साइबर ठगों का गढ़ रहा है। ठगों के मकड़जाल से घिरे कुशीनगर में समय समय पर अलग अलग स्तर के फ्राड हुए। सूत्रों के अनुसार इस गिरोह में शामिल ठग कम उम्र के लड़के हैं जो इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए तकनीक का फायदा उठाते हैं।
चाहे वह खड्डा क्षेत्र का ठगी का ताजा मामला हो या कुछ दिन पूर्व बंद हुए सिमकार्ड के सहारे ठगी का मामला हो। विदेश भेजने के नाम पर भी ठगी होता रहता है। तमकुही राज और सीमावर्ती गोपालगंज के इलाकों में भी ठगी के मामले आ चुके हैं। यूपी बिहार बार्डर के बलथरी चेकपोस्ट पर अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधी गिरफ्तार हुए थे। कुशीनगर का भौगोलिक परिदृश्य कुछ इस कदर है कि दो दिशाओं में यह बिहार के दो जिलों से जुड़ा हुआ है जहां अपराधियों की धमक खूब सुनाई देती है। बिहार, बंगाल और झारखंड से साइबर गैंग के सरगना कुशीनगर जिले और आसपास के सीमावर्ती इलाके में फ्रॉड करते हैं। कभी कुशीनगर और बिहार सीमा पर पुलिस सीमकार्ड बरामद करती है जिसका कनेक्शन बंगाल से जुड़ा रहता है ।