पडरौना। कभी एनआरएचएम घोटाले में आरोपी बनाए जाने तो कभी अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहने वाले फार्मासिस्ट अशोक यादव को सीएमओ ने मंगलवार को सस्पेंड कर दिया।
विशुनपुरा थाना क्षेत्र के एएनएम सेंटर पर हुए विवाद के मामले में छेड़खानी पीड़िता को धमकी देने के मामले में एसडीएम कोर्ट से जमानत नहीं मिलने पर जेल भेजा गया था। चार दिनों बाद जेल से रिहा होने के बाद उसने सीएमओ को पत्र भेजकर जानकारी दी थी।
सीएमओ ने देवरिया जेल अधीक्षक को पत्र लिखकर फार्मासिस्ट के कारगार में रहने की अवधि की सूचना मांगी। चार दिनों के बाद रिहाई होने की पुष्टि होने पर सीएमओ ने फार्मासिस्ट को सस्पेंड कर दिया।
कुशीनगर सीएमओ कार्यालय में करीब तीन दशक से जमे अशोक यादव का स्थानांतरण कुछ माह पूर्व लखीमपुर खीरी जिले में हो गया है। उसकी मूल तैनाती क्षय रोग कार्यालय में थी। लेकिन, अपने रसूख के बल पर वह सीएमओ कार्यालय से खुद को अटैच करा लिया था। सीएमओ कार्यालय के सीएसएमडी विभाग में तैनात फार्मासिस्ट अशोक यादव ने साल 2021 में कोरोना के दौरान एमसीएच विंग को एक पांच लीटर का सेनेटाइजर उपलब्ध कराया था, जिसमें पानी की मिलावट की गई थी। इस मामले में अशोक यादव के खिलाफ पडरौना कोतवाली में केस दर्ज कराया गया था और उसे जेल भी जाना पड़ा था। इसके पहले वह एनआरएचएम घोटाले में भी तिहाड़ जेल में सजा काट चुका है। एनआरएचएम घोटाले में 12 जुलाई 2013 से 26 सितंबर 2013 और 6 सितंबर 2016 से 17 सितंबर 2016 तक गाजियाबाद के डासना जेल में भी बंद था। जेल में बंद होने के बावजूद विभाग की ओर से इसका मेडिकल लगाकर वेतन इसके खाते में समय से भेज दिया जाता था। घोटाले के बाद तेजी से जांच बढ़ी तो इनकम टैक्स विभाग का इसके घर छापा भी पड़ा और नकदी रुपये भी बरामद किए गए थे। 15 अक्तूबर को विशुनपुरा थाना क्षेत्र के गौरी श्रीराम एएनएम सेंटर पर इलाज कराने आई गर्भवती महिला की बहन के साथ एएनएम के पति ने छेड़छाड़ की थी। पूछताछ करने पर एएनएम, उसके पति और फार्मासिस्ट अशोक यादव ने अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी थी। पीड़िता की सूचना पर आई पुलिस ने एएनएम समेत तीन लोगों को हिरासत में लेकर थाने चली गई थी, जहां कार्रवाई के बाद अगले दिन अशोक यादव को जेल भेज दिया गया था।
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