तमकुहीरोड। सिंचाई और लोकनिर्माण विभाग की उदासीनता से नाराज पिपराघाट के लोगों ने शनिवार को गांव में कटान स्थल पर प्रदर्शन कर छठ बाद आंदोलन शुुरू किए जाने की चेतावनी दी।
गांववालों का कहना है कि विरवट कोन्हवलिया और अहिरौलीदान में कटान रोकने की कार्ययोजना पर सिंचाई विभाग की ओर से काम कराया जा रहा है, लेकिन सर्वाधिक क्षति वाले पिपराघाट की उपेक्षा की जा रही है। प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना है कि पिछले मानसून सत्र में तहसील क्षेत्र के तीन गांव गंडक नदी के निशाने पर थे।
जिसमें विरवट कोन्हवलिया और अहिरौलीदान में कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग के अनुरोध पर पटना के गंडक विभाग की मिनी हाई लेवल कमेटी और बाढ़ खंड कुशीनगर के अभियंता दो बार दौरा करने के बाद कटान रोकने के लिए कार्ययोजना को अंतिम रूप देने में लगे हैं।
वहीं सर्वाधिक क्षति वाले गांव पिपराघाट की उपेक्षा की जा रही है, इससे लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि पिपराघाट में हुई इस साल तबाही में लोकनिर्माण विभाग की पिच सड़क लगभग एक किलोमीटर कट गई और गांव में जाने के रास्ते बंद हो गए। इतना ही नहीं गंडक अब तक सैकड़ों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि को काटकर गांव के समीप पहुंच गई है।
इसकी चिंता ना तो सिंचाई विभाग के अधिकारियों को है और ना ही लोकनिर्माण विभाग को है। इस उपेक्षा से नाराज गांववालों ने कटानस्थल पर प्रदर्शन कर चेतावनी दी कि शीघ्र पिपराघाट को बाढ़ और कटान से बचाने का उपाय नहीं किया गया तो छठ बाद आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
इस मौके पर पुजारी सिंह, अशोक सिंह, सरल शर्मा, शिवजी सिंह, महातम सिंह, हरिकेश सिंह, हरिहर यादव, रमाशंकर सिंह, मोतीलाल, सुरेंद्र, जितेंद्र, श्रवण, इंद्रजीत आदि मौजूद रहे।