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गेहूं खरीद में पिछड़ा जिला, अब धान खरीद की तैयारी

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गेहूं खरीद में पिछड़ा जिला, अब धान खरीद की तैयारी
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- मंडल में गेहूं खरीद में महराजगंज अव्वल
- बाजार भाव का सरकारी दर के आसपस रहना है कम खरीद की वजह
- जिले में गन्ने के रकबे में 36 फीसदी की हुुई वृद्घि भी रही खास वजह
अमर उजाला ब्यूरो
कुशीनगर। जिले में सरकारी गेहूं की खरीद में लचर व्यवस्था के कारण लक्ष्य के सापेक्ष कम खरीद हुई है। जबकि गोरखपुर मंडल में महराजगंज जिला अव्वल रहा। इसके पीछे बाजार भाव का सरकारी खरीद के बराबर होना और गन्ने की बुआई का रकबा ज्यादा होना भी है। अब अधिकारियों की नजर धान खरीद की तैयारियों पर है। ताकि लक्ष्य हासिल किया जा सके।
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जिले में गेहूं खरीद के लिए कुल 102 क्रय केंद्र खोले जाने थे। जबकि 101 क्रय केंद्र ही खोले गए थे। 64000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन जिले में सिर्फ 56.41 फीसदी ही खरीद हो पाई, जिसमें क्रय एजेंसियां पीसीएफ और पीसीयू फिसड्डी रही। जबकि महराजगंज जिला में कुल 82.38 फीसदी गेहूं की खरीद हुई। इसके अलावा गोरखपुर में 67. 40 फीसदी और देवरिया में 63.90 फीसदी खरीद हुई है। गेहूं खरीद में कमी होने का विभागीय तर्क है कि बाजार दर का सरकारी दर के बराबर होना है। जिले में 223836 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। वर्ष 2017-18 में 117733 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हुई थी। जबकि वर्ष 2018-19 में 119725 हेक्टेयर में बुआई की गई थी। पहले गन्ने की बुआई 63000 हेक्टेयर में होती थी। गन्ने के रकबे में 36 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। डिप्टी आरएमओ विनय सिंह ने बताया कि जिले में सिर्फ 56.41 फीसदी ही गेहूं की खरीद हुई है, जो लक्ष्य से कम है। बाजार में गेहूं प्रति क्विंटल 1770 से 1820 रुपये बिका है। जबकि सरकारी दर 1840 रुपये थी। आढ़ती छोटे किसानों के घर पहुंच कर गेहूं की खरीद कर रहे थे। सरकारी और बाजार भाव में सिर्फ 20 रुपये का अंतर रहा। नए वित्तीय वर्ष में धान की खरीद के लिए तैयारी की जाएगी, ताकि लक्ष्य से अधिक खरीद हो सकें। शासन की मंशा है किसानों को कोई असुविधा न हो, इसका ख्याल रखा जाएगा।
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