जनप्रतिनिधियों ने नहीं सुनी गुहार तो सीमेंट की बोरियों में बालू भरकर श्रीपतनगर गांव के लोगों ने ?
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जनसहयोग से हुई निर्माणाधीन छितौनी-तमकुही रेल मार्ग पर बांध की मरम्मत
छितौनी। निर्माणाधीन छितौनी-तमकुही रेल मार्ग पर बना मिट्टी का बांध टूटने से छितौनी कस्बा व आसपास के लोग महीने भर से बाढ़ की त्रासदी झेल रहे थे। टूटा हिस्सा बिहार सरकार के अधीन होने के चलते अभी तक बचाव कार्य शुरू नहीं कराया गया था और रेलवे अपने इस निर्माणाधीन प्रोजेक्ट को लेकर उदासीन ही है। जन प्रतिनिधियों से कहने का भी कोई फायदा नहीं हो रहा था। शनिवार को आसपास के ग्रामीणों ने खुद ही बांध के टूटे हिस्से की मरम्मत कर दी।
इस साल बरसात में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने पर निर्माणाधीन छितौनी-तमकुहीरोड रेल मार्ग के लिए बना बांध सीमावर्ती बिहार प्रांत के पिपरासी प्रखंड के सेमरा लबेदहा पंचायत के श्रीपतनगर गांव के समीप टूट गया था। जिससे बिहार के आधा दर्जन गांवों के अलावा छितौनी कस्बा व अगल-बगल के गांवों में भी पानी भर गया था। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों के पास गुहार लगाई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बिहार प्रशासन ने बाढ़ खत्म होने के बाद ही यहां मरम्मत कार्य कराने की बात कही थी। इसको देख ग्रामीणों ने खुद के सहयोग से बंधे की मरम्मत का निर्णय लिया। शनिवार को जनसहयोग से बालू व मिट्टी से भरे बोरे रखकर टूटे हिस्से को भर दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि इस बंधे के टूटे हिस्से से गंडक नदी का पानी गांव के तरफ बह रहा था। नदी का जलस्तर बढ़ते ही आबादी में पानी घुस जाता था। धीरे-धीरे यहां करीब 50 मीटर तक हिस्सा कट गया था। बाढ़ के पानी से मंझरिया पंचायत के साथ अलावा छितौनी, नरकहवा, बलुआ टोला आदि गांव भी प्रभावित हो रहे थे। जलभराव के कारण फसल भी नष्ट हो गई है।
ग्रामीण नीरज सिंह, बालेंद्र नारायण सिंह, धनेसर यादव, वीरेंद्र कुमार, रियाजुद्दीन अली, शंकर राम, संदीप बैठा आदि ने चंदा लगाकर बांध की मरम्मत के लिए जरूरी सामान का इंतजाम किया। इन लोगों ने बताया कि करीब सात हजार सीमेंट की बोरियों में मिट्टी व बालू भरकर बांध के टूटे हिस्से को भर दिया गया है।