सुबह तक डोल मेला का आनंद लेते रहे लोग
पडरौना। शहर में डोल मेला परंपरागत ढंग से सकुशल संपन्न हो गया। शहर के विभिन्न मोहल्लों से डोल और अखाड़े निकले। इनमें आयोजन समितियों के सदस्यों के अलावा काफी संख्या में दर्शक भी मेला देखने के लिए पहुंचे। कोरोना महामारी के बाद डोल मेले में रविवार की रात पहला ऐसा अवसर रहा, जब काफी भीड़ देखी गई। बच्चे, किशोरों और युवाओं ने मेले में खिलौने, मिठाइयां और अन्य जरूरत की वस्तुएं खरीदीं। युवकों में टैटू बनवाने का शौक खूब देखा गया।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के तीसरे दिन अशहर में डोल निकाला जाता है। डोल में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रहती है, जिसकी जगह-जगह श्रद्धालु पूजा करते हैं। कोरोना महामारी के कारण दो साल डोल मेला नहीं लग पाया। पिछले साल भी डोल मेले में रौनक नहीं थी, लेकिन स्थिति सामान्य हो जाने के कारण इस बार के डोल मेले में काफी भीड़ देखी गई। पडरौना शहर ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों से भी काफी संख्या में लोग डोल मेला देखने के लिए आए थे। रात नौ बजे से लेकर सोमवार को सुबह छह बजे तक शहर में मेला लगा था।
महाबीरी गली, कसेरा टोली, सुभाष चौक, साहबगंज, तुरहा टोला, बावली चौक, तिलक चौक, दरबार रोड, बेलवा चुंगी, कोठा दरबार, छावनी व लाला टोला आदि मोहल्लों से भगवान श्रीकृष्ण का डोल निकाला गया। अखाड़े के खिलाड़ी डंडा भांजकर, शीशे के नुकीले भाग पर लेटकर, आग के गोलों से खेलकर आदि कई तरह के करतब दिखाए। इसके अलावा राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, राम-सीता, मां काली व देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत झांकियां मेले में आकर्षण का केंद्र रहीं। नर्तकियों ने गीतों पर नृत्य किया। मेला सकुशल संपन्न कराने के लिए कई थानों की पुलिस, पीएसी व महिला पुलिसकर्मी तैनात रहीं।