पडरौना। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े जिम्मेदारों ने कुशीनगर जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कृष्णा डायग्नोसिस नाम के फर्म की पैथॉलोजी को मंजूरी दी है। जिले के सरकारी अस्पतालों में इस प्राइवेट फर्म की इकाइयां बीते मई महीने से ही जनपद में संचालित हो रही हैं। अभी रामकोला में सात लाख रुपये के फर्जी भुगतान को लेकर चर्चा में आए इस फर्म की एक इकाई जो तमकुहीराज में संचालित थी, तीन महीने पहले फर्जी तरीके से जांच रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में बंद कर दी गई। इसके अलावा अन्य सीएचसी में भी कहीं लैब में संसाधन नहीं हैं तो कहीं सिर्फ सैंपल एकत्र किया जा रहा है, लेकिन उसी के आधार पर बिल वाउचर तैयार कर विभाग को भुगतान के लिए भेजा जा रहा है।
जनपद के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कृष्णा डाइग्नोस्टिक की 14 इकाइयां स्थापित की गई हैं। ये इकाइयां जनपद के रामकोला, कप्तानगंज, सेवरही, मथौली बाजार, कुबेरस्थान, हाटा, सेवरही सभी सीएचसी पर खोली गई हैं। प्रत्येक सेंटर पर एक-एक व्यक्ति की तैनाती भी कर दी गई, जिसके जिम्मे मरीज का ब्लड, यूरीन आदि का सेंपल लेकर जांच करना था, लेकिन इन सेंटर पर न तो संसाधन भरपूर थे और न ही नियमसंगत तरीके से जांच होती थी। तमकुहीराज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित इस डाइग्नोस्टिक सेंटर में गड़बड़ी तीन महीना पहले ही पकड़ में आ गई थी।
तमकुहीराज सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशु मिश्र की मानी जाए तो उत्तम जांच के नाम पर फर्म की ओर से काफी गोलमाल किया जा रहा था। फर्म फर्जी बिल-वाउचर बनाकर भुगतान करा रही थी। मरीज की पर्ची पर किसी एक जांच के लिए लिखा जाता था, लेकिन फर्म के लोग अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए आधा दर्जन से अधिक जांच करते थे। संदेह होने पर जांच की गई तो मामला पकड़ा गया। तीन महीने से सीएचसी में इस सेंटर को सैंपल देना बंद कर दिया गया।
दुदही सीएचसी में यह सेंटर अप्रैल से संचालित हो रहा है। इसके एलटी के पास डिग्री नहीं थी। मामला उजागर होने पर जुलाई में फर्म ने यह काम धनवंतरी पैथालॉजी को सौंप दिया। यहां 23 तरह की जांच होती है। बताया जा रहा है कि अधिक भुगतान के लिए वह जांच भी होती है, जो वहां संभव नहीं है।केस-तीन
कसया सीएचसी के अधीक्षक डॉक्टर अरुण कुमार पांडेय कहना है कि पिछले वर्ष कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर नाम से इकाई खोलने के लिए फर्म के लोग आए थे, लेकिन उन्होंने अस्पताल की शर्त पूूरी नहीं की। इसलिए उन्हें वापस कर दिया गया।
खड्डा सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में तैनात इस फर्म का कर्मचारी ब्लड, यूरीन सहित अन्य सैंपल गोरखपुर भेजता है। यहां जांच की सुविधा नहीं है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मुफ्त पैथोलॉजी जांच के नाम पर टेंडर लेने वाली कंपनी कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर की तरफ से पैथालॉजी जांच में गड़बड़ी किए जाने का मामला बीते वर्ष अगस्त माह में भी सामने आया था। जांच में यह बात उजागर हुई थी कि उस फर्म ने गोरखपुर मंडल में ऐसी दूसरी कंपनी को यह काम सौंप दिया था, जिसके पास पैथोलॉजी जांच के लिए बुनियादी ढांचा तक नहीं था। इतना ही नहीं, ज्यादा भुगतान पाने के लिए लगातार फर्जी जांचें भी की गईं।
एनएचएम के तहत राज्य में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर पैथोलॉजी जांच का फैसला किया गया। इसके लिए सात फरवरी 2017 को कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर के साथ करार हुआ था। पहले चरण का काम सात अप्रैल तक पूरा करना था। साथ ही योजना में शामिल सीएचसी और अस्पतालों पर सेंटर को मानकों के अनुसार स्थापित कर रन करना था, मगर ऐसा नहीं किया गया। इसका राजफाश स्वास्थ्य महानिदेशक की जांच में हुआ था।
रामकोला सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रजनीश श्रीवास्तव की मानी जाए तो बीते वर्ष अक्टूबर माह में एक ही पर्ची पर 40-40 जांच लिखी गई थी। उस महीने 600 से अधिक सैंपल की जांच का बिल-वाउचर तैयार कर एप्रुव करने के लिए मिला था। सीएमओ कार्यालय में बिल पहुंचते ही सभी चौंक गए थे। सीएचसी प्रभारी ने उस बिल पर अपना हस्ताक्षर होने से भी इनकार किया है।
कृष्णा डायग्नोस्टिक नाम के इस फर्म के एलटी मैनेजर रतन तिलक का कहना था कि जनपद में उनकी 14 इकाइयां संचालित हैं। अक्टूबर माह में स्वास्थ्य कैंप लगे होने के कारण इतनी अधिक जांच हुई थी। उनका कहना था कि अभी तक उनके फर्म को विभाग की ओर से भुगतान नहीं मिला है।
सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार का कहना है कि मामला गंभीर है। रामकोला सीएचसी में इस फर्म से संबंधित मामले की जांच कराई जा रही है। इसके अलावा जनपद के अन्य सीएचसी पर स्थित इस फर्म की इकाइयों की भी जांच कराई जाएगी। वहां भी कमी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।