पडरौना। मौसम की तल्खी से मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। इसके चलते चिकित्सा व्यवस्था लड़खड़ा गई है। पर्ची काउंटर से दवा काउंटर तक पहुंचने में करीब दो घंटे लग जा रहे हैं। अगर खून की जांच या एक्सरे करानी पड़ गई तो मरीजों को दूसरे दिन ही इलाज मिल पाएगा।
सुबह आठ बजे ओपीडी का रजिस्ट्रेशन काउंटर खुला, तब तक मरीजों कतार लग चुकी थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया तो मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी। दिन के करीब 11 बजे ओपीडी में बैठे फिजीशियन डॉ. दीनमोहम्मद के कक्ष के आगे मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। चेस्ट फिजीशियन डॉ. उपेंद्र चौधरी किसी कार्य से बाहर गए थे। उनकी जगह पर कक्ष में बैठे सीनियर व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर मरीजों का उपचार कर रहे थे। अधिक संख्या होने के कारण डॉक्टरों के कक्ष में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। जिन मरीजों को तीन दिन से अधिक बुखार की शिकायत थी, उन्हें डॉक्टरों ने खून की जांच कराने की सलाह दे रहे थे। दोपहर 12:05 बजे मेडिकल कॉलेज के पैथालॉजी विभाग में रजिस्ट्रेशन के लिए काउंटर पर मरीजों की भारी भीड़ नजर आई। इंटरनेट की गड़बड़ी के कारण यहां रजिस्ट्रेशन की रफ्तार सुस्त रही। वहीं, जनरल व इमरजेंसी वार्ड भी मरीजों से भरा रहा। इन वार्डों में सर्वाधिक डायरिया के मरीज रहे। उपचार के बाद निकले मरीज व तीमारदारों को दवा लेने के लिए काउंटर पर लगी कतार में काफी इंतजार करना पड़ा।
-
पैथाेलॉजी विभाग की सुस्ती से मरीजों की बढ़ी सांसत
-मेडिकल कॉलेज में जिले के अलावा बिहार और देवरिया जिले से मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं। तीन दिनों से लगातार बुखार होने, भूख कम लगने, शरीर में कमजोरी होने व ऑपरेशन से पूर्व होने वाली खून जांच के लिए डॉक्टर मरीजों को भेज रहे है। पैथालॉजी विभाग में पहले तो रजिस्ट्रेशन के लिए मरीजों को काफी वक्त इंतजार करना पड़ रहा है तो रजिस्ट्रेशन के बाद सैंपल देने के लिए भी उन्हें घंटों तक खड़ा रहना पड़ रहा है। सैंपल देने के बाद मरीजों को यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि रिपोर्ट अगले दिन मिलेगा। दुबौली गांव की सीमा देवी, नेबुआ नौरंगिया के शिवशंकर प्रसाद, बांसी के मंगल कुशवाहा का कहना था कि वह दूर से आए हैं। खून जांच कराने की सलाह पर वह पैथालॉजी विभाग में आये तो उन्हें सैंपल देने में एक से डेढ़ घंटे का वक्त लग गया। अब रिपोर्ट के लिए दूसरे दिन बुलाया जा रहा है। इससे आने-जाने में उन्हें अनावश्यक खर्च करना पड़ेगा।
वायरल फीवर के साथ उल्टी-दस्त के बढ़े मरीज
फोटो है
कसया। गर्मी की वजह से नगर स्थित सीएचसी में सोमवार को वायरल फीवर के साथ उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ गई। मरीजों का जांचकर जरूरी दवा देने के अलावा चिकित्सक गर्मी से बचने की सलाह दे रहे हैं। डाॅ. जलज गुप्ता ने बताया कि गर्मी के मौसम में वायरल फीवर के अलावा उल्टी-दस्त के काफी मरीज आ रहे है। खान-पान में जरा सी गड़बड़ी होने पर तुरंत पेट खराब हो जा रहा है। कई बार लू लगने, तेज धूप और गर्मी से भी उल्टी-दस्त की समस्या उत्पन्न हो जाती है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल में दिक्कत से डायरिया होती है। आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस की वजह से यह समस्या होती है। कई बार समस्या इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ जाता है। इन सबसे बचने के लिए धूप से बचना चाहिए। धूप में निकलने के लिए पूरे बदन पर कपड़े होने चाहिए। शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें। नींबू पानी का सेवन अधिक करना चाहिए। ठंडी चीजें खानी चाहिए। धूप से आकर तत्काल ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। गर्मी के मौसम में इलाज के साथ बचाव जरूरी है। सीएचसी में 2 बजे तक करीब 400 मरीज ओपीडी में देखे गए थे। इनमें 70 से 80 प्रतिशत मरीज वायरल फीवर और उल्टी-दस्त से परेशान थे। सीएचसी अधीक्षक डा मार्कंडेय चतुर्वेदी ने बताया कि गर्मी में वायरल फीवर सहित उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ी है। उनको दवा देने के साथ ही बचाव के भी उपाय बताए जा रहे हैं।