कसया। वर्षों बाद ग्रहों का ऐसा संयोग इस वर्ष चैत्र नवरात्र में बन रहा है, जो आदि शक्ति मां जगदंबा की पूजा-अर्चना करने वालों के लिए फलदायी होगा। साथ ही मेष, वृष, सिंह, कुंभ राशि वालों के लिए विशेष फलदायी साबित होगा। नौ दिन का व्रत रहने वाले श्रद्धालु 18 अप्रैल को सुबह पारण करेंगे। ज्योतिषाचार्य अवनीश कुमार त्रिपाठी के अनुसार, चैत्र नवरात्र का पर्व 9 अप्रैल से शुरू होकर 17 अप्रैल तक चलेगा। नवरात्र में ग्रहों के विशेष गोचर के कारण पांच राजयोग बन रहे हैं, जो मान-सम्मान के साथ धन लाभ प्रदान करेंगे। चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग, शुक्र और बुध की युति से लक्ष्मी नारायण योग, सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग, शुक्र अपनी उच्च राशि में होने से मालव्य योग बन रहे हैं। जबकि शनि के कुंभ राशि में होने से शश नामक राजयोग का निर्माण हो रहा है। ग्रहों का यह गोचर मेष, वृष, सिंह व कुंभ राशि वाले के जीवन में विशेष खुशियां लेकर आया है। पंडित त्रिलोकीनाथ मिश्रा का कहना है कि महावीर पंचांग के अनुसार नौ अप्रैल को प्रतिपदा तिथि के दिन रेवती व अश्वनी नक्षत्र प्राप्त हो रहा है। इस तिथि को दिन में 3 बजकर 17 मिनट तक वैधृति योग है। उसमें कलश स्थापना निषिद्ध है। इसलिए कलश स्थापना 3 बजकर 17 मिनट के बाद सूर्यास्त तक कर सकते हैं। इसके पूर्व अभिजीत मुहूर्त के दौरान दिन में 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजाकर 24 मिनट के मध्य कलश स्थापित करना उत्तम रहेगा। हालांकि, गणेश पंचांग में 9 बजकर 52 मिनट से पहले कलश स्थापित करने की बात कही गई है। 16 अप्रैल को महाष्टमी , 17 अप्रैल को महानवमी होगी। नौ दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु 18 अप्रैल को सुबह व्रत का पारण करेंगे।