पडरौना। जिला अस्पताल में फेको विधि से आंख का ऑपरेशन कराने आने वालों को लेंस बाहर से खरीदकर लाना पड़ रहा है। खुद अस्पताल कर्मी ही लोगों को अस्पताल का लेंस खराब बताकर उन्हें बाहर से लेंस खरीदने को प्रेरित कर रहे हैं। इससे गरीब मरीजों को कई हजार रुपये खर्च करने पड़े रहे हैं।
आंख के ऑपरेशन के लिए फेको विधि सबसे अच्छी मानी जाती है। प्राइवेट अस्पताल में इस विधि से ऑपरेशन कराने पर लोगों को 10 से 15 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। तमाम गरीब लोग इस ऑपरेशन के लिए नेपाल के भैरहवा तक जाते हैं। शासन ने यह सुविधा कुशीनगर के जिला अस्पताल में भी उपलब्ध कराई है। इसके लिए अस्पताल के डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिलाया गया है। यहां फेको विधि से नि:शुल्क ऑपरेशन होता है। इस विधि से ऑपरेशन के लिए जिला अस्पताल में हर दिन बड़ी संख्या में मरीज आ रहे हैं। शुरूआत में तो व्यवस्था ठीक थी, लेकिन मरीजों की भीड़ बढ़ने के साथ ही यहां भी बिचौलिए हावी हो गए। बिचौलियों को अस्पताल के कुछ कर्मचारियों से भी मदद मिल रही है। ये कर्मचारी लोगों को सरकारी अस्पताल का लेंस खराब बताकर इसे बाहर की दुकानों से खरीदने के लिए प्रेरित करते हैं। इनके दबाव में आए मरीज बाहर की दुकानों से लेंस खरीदकर लाते हैं। स्थिति यह है कि जो लेंस सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क लगाई जाती है, वही बाहर की दुकानों पर डेढ़ हजार से लेकर नौ हजार रुपये तक में बेंची जा रही है।
बुधवार को जिला अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर के बाहर ऑपरेशन के लिए बैठे मल्लूडीह गांव के मोती, रामप्रवेश, हरपुर गांव के रामजीत, रामबर की भगवती देवी आदि का कहना था कि यहां कर्मचारियों ने बताया कि अस्पताल का लेंस खराब है, तो वे लोग बाहर से दो हजार का लेंस खरीदकर ले आए हैं।
इस संबंध में जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर लालता प्रसाद का कहना है कि इस तरह की कोई शिकायत उनके पास नहीं आई है। अस्पताल में अच्छी क्वालिटी का लेंस उपलब्ध है और ऑपरेशन भी नि:शुल्क होता है। अगर कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच कराकर कार्रवाई होगी।