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ऑनलाइन पढ़ाई

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खानापूरी ही है ऑनलाइन पढ़ाई
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पडरौना (कुशीनगर )। माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई का दावा किया जा रहा है। लेकिन नेटवर्क संबंधी दिक्कत व अधिकांश अभिभावकों के पास एंड्रायड फोन नहीं होने की वजह से पढ़ाई का दावा कागजी अधिक है। कई अभिभावकों के पास महज एक ही एंड्रायड फोन है। अभिभावक सुबह अपने काम पर चले जाते हैं और शाम को लौटते हैं। लिहाजा समय पर बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करने में मुश्किल हो रही है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद यूपी बोर्ड की परीक्षा निरस्त कर स्कूलों को बंद कर दिया। जुलाई में स्कूल खुले तो शासन की तरफ से ऑनलाइन पठन-पाठन शुरू करने के लिए निर्देश दिया गया। इसके अनुपालन में माध्यमिक स्कूलों में व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर पढ़ाई शुरू कर दी गई। लेकिन अभिभावकों के पास संसाधनों की कमी और नेटवर्क की समस्या के चलते ऑनलाइन पढ़ाई बेमतलब साबित हो रही है।
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उदित नारायण इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर कॉलेज में विद्यार्थियों और शिक्षकों का विषयवार व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। इसमें शिक्षक नियमित रूप से संबंधित विषय से संबंधित जानकारी शेयर करते हैं। लेकिन अभिभावकों के पास संसाधनों की कमी के चलते नामांकित विद्यार्थियों की अपेक्षा कम बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। जो विद्यार्थी कॉलेज के व्हाट्सएप से अभी तक नहीं जुड़ सके हैं, उनके अभिभावकों को कक्षा अध्यापकों व्यक्तिगत रूप से मिलकर, फोन कर या अन्य संसाधानों के जरिए संपर्क कर ऑनलाइन पढ़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
किसान इंटर कॉलेज पिपरा बाजार के प्रधानाचार्य डॉ. अश्वनी कुमार पांडेय ने बताया कि वित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में नामांकित विद्यार्थियों के अभिभावक अत्याधुनिक संसाधनों से युक्त नहीं हैं। करीब 60 फीसदी अभिभावकों के पास एंड्रायड फोन नहीं है। जिनके पास एंड्रायड फोन हैं, उनके पास इंटरनेट की सुविधा समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती है। लिहाजा बच्चों तक विषय वस्तु सामग्री ऑनलाइन पहुंचाने में परेशानी हो रही है।
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अभिभावक नत्थूलाल कुशवाहा ने बताया कि उनके पास एंड्रायड फोन तो है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में नेटवर्क कमजोर होने के चलते बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करने में परेशानी होती है। अभिभावक नंदू कुशवाहा ने बताया कि उनके पास एक ही एंड्रायड फोन है। दिन में वह अपने काम पर चले जाते हैं और शाम को घर आते हैं। इसके चलते उनके बच्चे स्कूल समय में ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। शाम को बच्चों को मोबाइल देता हूं तो वह कुछ देर तक पढ़ाई करते हैं।
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