पडरौना। ‘ए भइया, ए चाचा, तनी हेलमेट दीं, तेल भरा के देत बानी..’ जिले में ‘नो हेलमेट नो फ्यूल’ व्यवस्था गणतंत्र दिवस से प्रभावी रूप से लागू होने के बाद अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ऐसे ही नजारे देखने को मिले।
बिना हेलमेट ईंधन लेने पहुंचे लोगों को जब कर्मचारियों ने तेल देने से मना किया तो हेलमेट लेनदेन की प्रक्रिया शुरू हुई और लोगों ने उधारी से अपनी जरूरतें पूरी कीं। पेट्रोल पंप कर्मचारियों ने विरोध किया तो उन्हें बहस का भी सामना करना पड़ा। विभिन्न कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर सख्ती दिखी। यही हाल ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में भी दिखा। एक तरफ जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बिना हेलमेट के पेट्रोल मिल भी जा रहा था तो शहर और नगर के पेट्रोल पंप कर्मचारी रिस्क लेने से बचते रहे। कई पेट्रोल पंपों पर बाइक सवारों और पेट्रोल पंपकर्मियों के बीच कहासुनी भी हुई।
जिले में ‘नो हेलमेट नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू हुई तो यहां भी लोगों ने जुगाड़ के सहारे काम चलाना शुरू कर दिया। डीएम ने पेट्रोल पंपों को आदेश दिया कि बिना हेलमेट वालों को तेल नहीं तो पब्लिक ने उधार के हेलमेट से काम चला लिया। एक ही हेलमेट के सहारे दस लोगों ने पंपों पर तेल भरवाया। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के पंपों पर अलग-अलग सख्ती दिखी।
इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सापेक्ष रिलायंस जियो और नायरा पर सख्ती अधिक थी। छावनी स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप पर एक स्कूटी से एक दंपती आए और कर्मचारी से 150 रुपये के ईंधन देने की बात कही। कर्मचारी ने बिना हेलमेट के तेल ना मिली...’ कहकर मना किया तो उसने बाजू के एक लड़के से ‘ए भाई हेलमेट दे दा...कहकर जरूरतें पूरी की। इस बीच कई बार पंप कर्मचारियों और लोगों के बीच बहस भी होती रही।