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कुशीनगर: एपी बांध टूटने से 30 गांवों में तबाही के बाद स्थायी समाधान की तैयारी, गंडक की होगी न्यूमेरिकल स्टडी

Mon, 26 Oct 2026 01:50 PM IST
अनुराग रंजन नीलांबुज मिश्र, संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर

सार

प्रोफेसर डॉ. एके पांडेय के अनुसार, गंडक जैसी विशाल नदी की धारा को नियंत्रित करने और तटबंधों को सुरक्षित रखने के लिए केवल मौके पर निरीक्षण करना पर्याप्त नहीं है। नदी के बहाव, जलस्तर, कटान और गाद के जमाव का वैज्ञानिक विश्लेषण भी जरूरी है। इसके लिए न्यूमेरिकल स्टडी यानी कंप्यूटर आधारित गणितीय मॉडलिंग की मदद ली जा सकती है
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एपी बांध पर पहुंचे आईआईटी बीएचयू से आए प्रोफेसर डॉ. एके पांडेय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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एपी बांध टूटने से तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के करीब 30 गांवों में मची तबाही की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी समाधान की तलाश तेज हो गई है। नारायणी (गंडक) नदी की धारा को नियंत्रित करने और तटबंधों को सुरक्षित रखने के लिए चेनलाइजेशन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इसके लिए तकनीकी अध्ययन कराया जा रहा है। रविवार को आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. एके पांडेय ने एपी बांध का निरीक्षण किया और नदी की भौगोलिक स्थिति का जायजा लिया। वह कंप्यूटर आधारित न्यूमेरिकल स्टडी के माध्यम से नदी के व्यवहार का विश्लेषण कर सरकार को प्रस्ताव सौंपेंगे।
नेपाल में तबाही के बाद नारायणी नदी में 5.50 लाख क्यूसेक से अधिक पानी पहुंचने पर 28 सितंबर की रात गौरहा गांव के पास एपी बांध टूट गया था। इससे तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के करीब 30 गांवों में बाढ़ से तबाही मची थी। इसके बाद 28 सितंबर को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थायी समाधान का आश्वासन देते हुए नदी के चेनलाइजेशन की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे।
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प्रोफेसर डॉ. एके पांडेय के अनुसार, गंडक जैसी विशाल नदी की धारा को नियंत्रित करने और तटबंधों को सुरक्षित रखने के लिए केवल मौके पर निरीक्षण करना पर्याप्त नहीं है। नदी के बहाव, जलस्तर, कटान और गाद के जमाव का वैज्ञानिक विश्लेषण भी जरूरी है। इसके लिए न्यूमेरिकल स्टडी यानी कंप्यूटर आधारित गणितीय मॉडलिंग की मदद ली जा सकती है।

इस अध्ययन में नदी की चौड़ाई, गहराई, बहाव की गति और जलस्तर से जुड़े आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग परिस्थितियों में नदी के व्यवहार का आकलन किया जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि तेज बहाव के दौरान किन स्थानों पर तटबंधों पर अधिक दबाव पड़ता है, कहां कटान की आशंका है और नदी की धारा किस दिशा में बदल सकती है।

इसके साथ ही नदी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी और गाद के जमाव का अध्ययन कर भविष्य में धारा में होने वाले बदलावों का भी आकलन किया जाएगा।

बाढ़ से बचाव के लिए तैयार होगा प्रस्ताव
तकनीकी अध्ययन से बाढ़ के संभावित प्रभावों का आकलन करने और संवेदनशील स्थानों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इसके आधार पर तटबंधों की मरम्मत, सुरक्षा संरचनाओं के निर्माण और कटान रोकने के उपायों की योजना तैयार की जा सकेगी। कंप्यूटर मॉडल पर अलग-अलग परिस्थितियों का परीक्षण करने से संभावित तकनीकी विकल्पों का आकलन भी किया जा सकता है।

चेनलाइजेशन की जरूरत का होगा आकलन
नदी के चेनलाइजेशन का उद्देश्य तकनीकी उपायों के जरिये उसकी धारा को निर्धारित दिशा में प्रवाहित करना है। इसके लिए नदी की प्राकृतिक बनावट, बहाव और आसपास के तटबंधों की स्थिति का अध्ययन जरूरी है। न्यूमेरिकल स्टडी के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि किन स्थानों पर नदी की धारा को व्यवस्थित करने, तटबंधों को मजबूत करने या कटान रोकने के लिए अतिरिक्त उपायों की जरूरत है। अध्ययन के बाद यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि चेनलाइजेशन उपयुक्त विकल्प है या बाढ़ से बचाव के लिए किसी अन्य तकनीकी उपाय को अपनाया जा सकता है।

आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. एके पांडेय ने एपी बांध का निरीक्षण किया है। वह बांध टूटने वाले स्थान पर भी गए और नदी की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन किया। कंप्यूटर की मदद से नदी की गतिविधियों को समझने के लिए न्यूमेरिकल स्टडी की जाएगी। इसके आधार पर प्रस्ताव तैयार कर सरकार को सौंपा जाएगा। अध्ययन से पता चलेगा कि नदी के चेनलाइजेशन की जरूरत है या किसी अन्य तकनीकी उपाय से बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है। -वीपी सिंह, चीफ इंजीनियर बाढ़ खंड गोरखपुर

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