अब घर की महिला को बनाएंगे नेता
पडरौना। जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा ब्लॉक प्रमुख के पांच पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित होने के बाद चुनाव की तैयारी में लगे धुरंधरों की रणनीति बदल गई है। पहले जो लोग खुद चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, अब वे घर की महिलाओं को आगे करेंगे। इतना ही नहीं, कई सरकारी कर्मचारी भी खुद की बजाय घर की महिला को चुनाव लड़ाने की तैयारी में जुट गए हैं।
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ही सरकार ने पंचायत चुनाव में एक तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया है। उद्देश्य तो यह था कि इससे राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी, लेकिन वास्तव में अब भी आधी आबादी का राजनीतिक क्षेत्र में कम ही दखल है। अधिकांश पदों पर ऐसी महिलाएं ही काबिज हैं जिन्हें घर के पुुरुष सदस्यों ने अपनी जगह पर स्थापित कर रखा है और सत्ता की बागडोर पीछे से संभाल रहे हैं। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष का पद पिछड़ी वर्ग महिला के लिए आरक्षित हुआ है। इसके अलावा ब्लॉक प्रमुख के पांच पद और ग्राम प्रधान के 339 पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष को छोड़कर अभी अन्य पदों के आरक्षण का निर्वाचन क्षेत्र तो तय नहीं हो पाया है, लेकिन पंचायत चुनाव में जो लोग खुद दावेदारी करने में सक्षम नहीं हैं वे अब घर की महिलाओं को चुनाव लड़ाने की तैयारी में जुट गए हैं।
सोशल मीडिया पर पत्नी को बता रहे कर्मठ
चुनाव में सोशल मीडिया का प्रयोग अब काफी बढ़ चुका है। हर चुनाव में प्रचार के लिए सोशल मीडिया का खूब उपयोग हो रहा है। पंचायत चुनाव भी इससे अछूता नहीं है। सोशल मीडिया पर प्रचार में जुटे कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने पत्नी को संभावित उम्मीदवार के तौर पर प्रस्तुत किया है। उम्मीदवार को कर्मठ, जुझारू और हरदिल अजीज बताती पोस्ट पर खूब कमेंट आ रहे हैं।
उम्मीदवारी की भी हो रही चर्चा
जिला पंचायत अध्यक्ष का पद पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित होते ही सोशल मीडिया पर संभावित उम्मीदवार को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। लोग अपने-अपने पसंदीदा उम्मीदवार का पक्ष मजबूत करने के लिए तर्क भी दे रहे हैं। शुक्रवार की रात में एक महिला नेता के सोशल मीडिया अकाउंट पर कई समर्थकों ने चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया तो महिला नेता ने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताकर खुद को किनारे कर लिया। इस पर देर रात तक बहस चलती रही। इस दौरान कई संभावितों के नाम पर चर्चा चलती रही।