दो अल्ट्रासाउंड सेंटर मिले अवैध
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तमकुहीरोड (कुशीनगर)। बंडी गंडक नदी की कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। जिसकी वजह से अहिरौलीदान में बाढ़ खंड की ओर से लगातार कराए जा रहे बचाव कार्य के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। एपी बांध और नदी के बीच की दूरी कम होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
गंडक नदी के कटान का रुख से कचहरीटोला और खैरखूटा टोला के वजूद पर एक बार फिर सेखतरा मंडराने लगा है। लोगों को कहना है कि अगर विभाग शीघ्र नदी के कटान पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लगा पाता है तो इन दोनों गांवों के बचे लोग भी दो-तीन दिनों के अंदर अपने मकानों को तोड़ने और पलायन के लिए विवश हो जाएंगे। पांच अगस्त से अब तक अहिरौलीदान के लोगों के लिए गंडक नदी अभिशाप बनी हुई है। अब तक कचहरी टोला, खैरखूटा, नोनियापट्टी, मदुरही आदि क्षेत्रों में नदी ने खूब तांडव मचाया है। अब तक डेढ़ सौ से अधिक परिवार अपने मकानों को तोड़कर न केवल इन गांवों से पलायन कर चुके हैं, वरन तीस से चालीस मकान कटान की चपेट में आ चुके हैं। आसपास के इन गांवों को गंडक नदी की कटान से बचाने के लिए बाढ़ खंड विभाग जुटा हुआ है। इसके बावजूद कटान रुकने का नाम नहीं ले रही है और एपी बांध और नदी के बीच की दूरी लगातार कम होती जा रही है। जिसके चलते कचहरीटोला और खैरखूटा दोनों गांवों के वजूद पर अब खतरा बढ़ता जा रहा है। जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल, बृजकिशोर सिंह, गोरख, सूर्यदेव, सत्येंद्र, बैरिस्टर सहित गांव में मात्र 20-30 पक्के मकान ही बचे हैं। इन लोगों का कहना है कि गंडक नदी में वाल्मीकि नगर बैराज से पानी के डिस्चार्ज में कमी आने और बचाव कार्य जारी रहने के बाद भी कटान जारी रहना खतरे का संकेत है। यही कारण है कि कटान से जो लोग जिन लोगों के घर प्रभावित नहीं हुए हैं, उनमें भी बेचैनी बढ़ गई है। कचहरी टोला और खैरखूटा गांव के बचे हुए लोगों ने नदी के रुख को देखते हुए अपना भवन तोड़ने और पलायन करने की तैयारी शुरू कर दी है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता भरत राम ने बताया कि बचाव कार्य जारी है। नदी से फिलहाल अभी कोई खतरा नहीं है।