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कुशीनगर मेडिकल कॉलेज: नवजातों के लिए वेंटिलेटर नहीं, पीआईसीयू, एसएनसीयू और आईसीयू....फिर भी करते हैं रेफर

Sun, 13 Sep 2026 03:23 PM IST
Rohit Singh आदित्य कुमार शाही, संवाद न्यूज एजेंसी/पडरौना

सार

मेडिकल कॉलेज में 30 बेड की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) है। यहां समय से पहले जन्मे, जन्म के समय 1.8 किलोग्राम से कम वजन वाले, जन्म के बाद तुरंत न रोने वाले नवजातों के साथ पीलिया, वायरल संक्रमण और झटके जैसी समस्याओं से पीड़ित बच्चों को भर्ती किया जाता है।
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नवजातों के लिए वेंटीलेटर की सुविधा नहीं - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मेडिकल कॉलेज कुशीनगर में नवजातों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जन्म के साथ गंभीर जटिलता या सांस लेने में अधिक परेशानी होने पर नवजातों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया जाता है।

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खास बात यह है कि मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू में 10 वेंटिलेटर युक्त बेड क्रियाशील हैं लेकिन इनका इस्तेमाल नवजातों के लिए नहीं किया जाता। वहीं,आईसीयू में मौजूद दो वेंटिलेटर युक्त बेड पुराने होने के कारण बंद पड़े हैं। 30 बेड की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भी नौ बेड तकनीकी खराबी के चलते निष्क्रिय हैं।

सुल्तानपुर में वेंटिलेटर की कमी के कारण नवजात की मौत के मामले में हाईकोर्ट की ओर से जांच के आदेश के बाद जिले में भी नवजातों के लिए उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की पड़ताल की गई। इसमें मेडिकल कॉलेज में नवजातों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा नहीं होने की बात सामने आई।

मेडिकल कॉलेज की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट में सभी 10 बेड वेंटिलेटर सुविधा से युक्त और क्रियाशील हैं। इस वार्ड में एक माह से 18 वर्ष तक के गंभीर और चोटिल बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया जाता है।

एसएनसीयू के 30 में नौ बेड खराब
मेडिकल कॉलेज में 30 बेड की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) है। यहां समय से पहले जन्मे, जन्म के समय 1.8 किलोग्राम से कम वजन वाले, जन्म के बाद तुरंत न रोने वाले नवजातों के साथ पीलिया, वायरल संक्रमण और झटके जैसी समस्याओं से पीड़ित बच्चों को भर्ती किया जाता है।

एसएनसीयू प्रभारी के मुताबिक, जन्मजात जटिलता वाले नवजातों का प्राथमिक उपचार करने के बाद उन्हें एंबुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया जाता है। होंठ कटे होने, पैर टेढ़े होने, पीठ में घाव अथवा सांस लेने में गंभीर समस्या वाले नवजातों को इलाज के लिए गोरखपुर भेजा जाता है।

शनिवार को एसएनसीयू के सभी 30 बेड पर नवजात भर्ती थे। प्रभारी के अनुसार, इनमें 21 बेड ही सक्रिय हैं, जबकि नौ बेड तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं। इन्हें ठीक कराने के लिए तकनीकी टीम को सूचना दी गई है।

बीते महीने ही दो नवजातों की गई जान
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08 अगस्त 2026: मेडिकल कॉलेज कुशीनगर में एक नवजात को वेंटिलेटर की सुविधा न होने की बात कहकर गोरखपुर रेफर किया गया था। रेफरल के फैसले और इलाज में देरी को लेकर परिजनों और डयूटी स्टॉफ के साथ तीखी बहस हुई थी। मामला खड्डा क्षेत्र का था। बच्चा किसी निजी अस्पताल में पैदा हुआ था। तबीयत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे।

-29 अगस्त 2026: थाना क्षेत्र के मठिया कठकुइयां के गणेश विश्वकर्मा की पत्नी मेडिकल कॉलेज, कुशीनगर में बच्चे को जन्म दिया। वेंटीलेटर न होने के कारण उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
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नवजातों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में दो सी-पैप मशीन हैं। जन्म के बाद सांस लेने में परेशानी होने पर नवजातों को सी-पैप से उपचार दिया जाता है। पीआईसीयू में 10 वेंटिलेटर युक्त बेड क्रियाशील हैं, जहां एक माह से 18 वर्ष तक के बच्चों को भर्ती किया जाता है। आईसीयू में मौजूद दो वेंटिलेटर पुराने होने के कारण इस्तेमाल में नहीं हैं:डॉ. दिलीप कुमार, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
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