पडरौना। इसे लोगाें में जागरूकता कहें या प्रचार का असर, अब आरओ के शुद्ध पेयजल के नाम पर धड़ल्ले से पानी का कारोबार हो रहा है। इस पानी की न तो कोई विभाग शुद्धता की जांच करता है और न ही आरओ प्लांट पर साफ-सफाई की कोई निगरानी की जाती है। बावजूद इसके आरओ के नाम पर पानी का यह कारोबार लगातार पांव पसार रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में रोजाना करीब सात लाख लीटर आरओ के पानी का कारोबार हो रहा है। शहर से देहात लेकर तक सैकड़ों आरओ प्लांट संचालित हो रहे हैं। शहर में ही करीब 50 आरओ प्लांट के जरिए जार में पानी की सप्लाई की जा रही है।
शहर के तुलसी आवास विकास, मुन्ना कॉलोनी, साहबगंज, जटहां रोड, अंबे चौक, बेलवा चुंगी, बावली चौक, नोका टोला आदि जगहों पर बिना पंजीकरण के आरओ प्लांट संचालित किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर आरओ प्लांट स्थापित हैं। शहर में एक प्लांट से प्रतिदिन कम से कम पांच से छह हजार लीटर पानी का आपूर्ति की जा रही है। प्लांट संचालक लोगों से आरओ के पानी के नाम पर 15 लीटर जार के 20 रुपये तक वसूल किए जा रहे हैं। मानकों की बात की जाए तो कोई प्लांट भू-गर्भ जल विभाग से पंजीकृत नहीं है। ऐसे में आरओ प्लांट से किस मानक के पानी की आपूर्ति की जा रही है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। पानी के डिब्बों पर रसायन की मात्रा, उत्पादन तिथि और खराबी की तिथि तक नहीं लिखी जा रही है।
500 पीपीएम तक होना चाहिए टीडीएस : उदित नारायण इंटर कॉलेज के वनस्पति विज्ञान के प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि शुद्ध पानी में टीडीएस की मात्रा 500 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) होनी चाहिए। इसका पीएच लेवल 7.0 से 8.5 के बीच होना चाहिए। इससे ज्यादा होने पर पानी नुकसानदेह है। निजी आरओ से आपूर्ति किए जाने वाले पानी में टीडीएस और पीएच की नियमित जांच होनी चाहिए।