शनिवार को भी जिले के बैंकों में नोट का संकट बरकरार रहा। रात के तीन बजे से ही लाइन में लगे लोगों को बड़ी मुश्किल के बाद भी दो हजार रुपये से ही संतोष करना पड़ा। पडरौना नगर समेत जिले के सभी बैंकों की यही स्थिति रही। फाजिलनगर के सेंट्रल बैंक में जाने के लिए भी दिन भर धक्का-मुक्की हुई। आर्थिक संकट की इस घड़ी में राष्ट्रीयकृत बैंकों के एटीएम का अब तक शटर तक नहीं उठा है।
नोटबंदी को एक महीने पूरे होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन इसके कारण उत्पन्न हुई दिक्कतों में कोई कमी नहीं आई है। निजी बैंक हों या राष्ट्रीयकृत, सभी ने अपनी सुविधानुसार न्यूनतम निश्चित रकम निर्धारित कर रखी है। मसलन, एक से दो हजार रुपये ही बैंकों के काउंटर से विड्रॉल पर मिल रहा है। यही हाल एटीएम पर है। पडरौना में एसबीआई और एचडीएफसी के बाद शनिवार को पंजाब एंड सिंध बैंक से भी दो-दो हजार रुपये प्रति एटीएम ग्राहकों को मिले, लेकिन रुपये खत्म होने के बाद स्थिति जस की तस हो गई। इस बीच ग्राहकों में धक्का मुक्की होती रही। इससे भी बदतर स्थिति ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों में रही, जहां रुपये के लिए लोग परेशान रहे।
बेलवा कारखाना प्रतिनिधि के अनुसार फाजिलनगर क्षेत्र के बेलवा कारखाना स्थित सेंट्रल बैंक की शाखा में सुबह दस बजे जैसे ही काउंटर से रुपये मिलने शुरू हुए, लोग उस तरह बढ़ चले। हालत यह रही कि बैंक के बाहर लगी लकड़ी की बल्ली टूट गई। आलम यह था कि महिलाओं की लाइन में पुरुष तक खड़े हो गए थे। इसकी सूचना शाखा प्रबंधक आशीष कुमार ने पटहेरवा थाने में दी, लेकिन भीड़ नियंत्रित करने के लिए कोई पुलिसकर्मी नहीं पहुंचा। शाखा प्रबंधक ने बताया कि 16 लाख रुपये मिले थे। उनमें से बुजुर्गों को चार हजार रुपये और अन्य ग्राहकों को दो-दो हजार रुपये दिया गया। एक गार्ड होने से बैंक में असुविधा हुई।