संयुक्त जिला चिकित्सालय में प्रसव के लिए भर्ती कराई गईं महिलाओं को फल, दूध और भोजन भी नहीं मिल रहा है। भर्ती महिलाओं ने बताया कि उन्हें दो दिन से कुछ भी नहीं दिया गया, जबकि जननी सुरक्षा योजना के तहत उन्हें दूध-भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। मंगलवार को उनके बेड पर चादर भी नहीं थी। इसके अलावा जिला अस्पताल की ओपीडी में मेडिकल स्टोर्स संचालकों के एजेंटों ने डेरा जमा लिया है। जैसे ही कोई मरीज डॉक्टर से दवा लिखी पर्ची हाथ में लेता है, वहां खड़े एजेंट उसे अपनी दुकान पर लेकर चले जाते हैं।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में भर्ती होने वाले मरीजों को जरूरत की वस्तुएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। प्रसव के लिए संयुक्त जिला अस्पताल में भर्ती कराई गई महिलाओं को दो दिन से खाने-पीने की कोई सामग्री नहीं दी गई थी। महिलाओं और उनके तीमारदारों ने बताया कि उन्हें बाहर से ही भोजन बनवाकर लाना पड़ रहा है। यहां तक कि दूध भी उन्हें बाहर से खरीदना पड़ रहा है। नियमत: भर्ती मरीजों के बेड की चादर प्रतिदिन बदली जानी चाहिए, लेकिन इन भर्ती मरीजों को मंगलवार के दिन चादर भी नहीं दी गई थी।
जिला अस्पताल कुछ दवा विक्रेताओं के एजेंटों का डेरा बन गया है। अस्पताल खुलते ही वे डॉक्टरों के कक्ष के इर्द-गिर्द खड़े हो जाते हैं और जैसे ही डॉक्टर मरीजों की पर्ची पर दवा लिखते हैं, ये एजेंट उन्हें घेर लेते हैं। दवा दिलाने के नाम पर मरीजों का शोषण करते हैं। क्योंकि डॉक्टरों की लिखी दवाओं के अलावा मनमाफिक दवाएं भी बढ़ाकर मरीजों को दे देते हैं और उसके एवज में मनमानी तरीके से रुपये लेते हैं। बताया जाता है कि इसमें कमीशन के रूप में अस्पताल के कुछ लोग भी लाभ लेते हैं। मंगलवार को भी अस्पताल की ओपीडी में ऐसे कई एजेंट मौजूद थे। यहां तक कि जिला अस्पताल की बाउंड्री के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर्स पर आसानी से आने-जाने के लिए मंगलवार को लेबर रूम के बगल का दरवाजा भी खोल दिया गया था।
इस संबंध में संयुक्त जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लालता प्रसाद का कहना था कि अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं को भोजन, फल अथवा दूध मिलता है कि नहीं इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। क्योंकि ये सामग्रियां पहुंचाने की जिम्मेदारी कांट्रैक्टर की है। उन्होंने बताया कि कांट्रैक्टर से दाल, चावल, सब्जी और रोटी के लिए ठेका हुआ है। मेडिकल स्टोर्स के एजेंट के संबंध में उनका कहना था कि अस्पताल में बहुत से लोगों का आना-जाना रहता है, ऐसे में एजेंटों की पहचान करना मुश्किल है।
प्रसूताओं ने खोली जननी सुरक्षा की पोल
कहा, न तो भोजन मिल रहा है न ही दूध
फोटो है।
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना।
प्रसूता महिलाओं की सुविधा के लिए सरकार ने जननी सुरक्षा योजना भले ही संचालित की हैं, लेकिन उसका लाभ जरूरतमंदों को पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल में भर्ती प्रसूता महिलाओं ने बताया कि दो दिन से भर्ती होने के बावजूद न तो उन्हें भोजन दिया गया और न ही दूध मिला।
जनरल वार्ड में भर्ती खरदेवा पिपरासी गांव की नूरजहां खातून ने बताया कि प्रसव के लिए सोमवार से ही भर्ती हैं। प्रसव के बाद वार्ड में उन्हें बेड पर पहुंचा दिया गया, लेकिन दो दिन से उन्हें अस्पताल की ओर से न भोजन मिला है और न ही दूध दिया गया।
हसना मठिया गांव से आई शोभा ने बताया कि वह भी दो दिन से भर्ती हैं। दूध-भोजन की कौन कहे, बेड पर चादर भी नहीं दी गई है।
अमडरिया उनिवासी रंजना का कहना था कि अस्पताल की तरफ से दूध-भोजन न मिलने के कारण उनके घरवाले खाने-पीने की वस्तुुएं बाहर से खरीदकर ले आ रहे हैं।
बसडीला की रहने वाली पूजा भी अन्य महिलाओं से इत्तेफाक रखती हैं। उन्होंने कहा कि दो दिन से अस्पताल में भर्ती हैं, फिर भी उन्हें दूध, भोजन या फल अस्पताल की तरफ से नहीं दिया गया।