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जिले में 13629 के सापेक्ष केवल 162 आवास ही पूर्ण हैं

Sun, 11 Feb 2018 12:04 AM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
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अधूरा आवास। - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना।  जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना का हाल खराब है। प्रदेश भर की प्रगति के मामले में जिला 63वें नंबर पर है। वित्तीय वर्ष खत्म होने में अब डेढ़ महीने का ही वक्त बचा है और अब तक महज 162 आवास ही पूर्ण हो पाए हैं, जबकि लक्ष्य 13629 आवासों के निर्माण का है। अब तक केवल 4782 आवासों के लिए ही बजट की तीसरी किस्त जारी हो पाई है। पिछले हफ्ते आए नोडल अफसर ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके स्थिति में बदलाव के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। 
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ग्रामीण क्षेत्र के निर्धन व असहाय लोगों के लिए भी पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत चयनित व्यक्ति को तीन किस्तों में 1.20 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा 15750 रुपये मनरेगा के बजट से मजदूरी के लिए तथा 12 हजार रुपये पंचायती राज विभाग की तरफ से शौचालय निर्माण के लिए अलग से मिलता है। इस तरह प्रत्येक लाभार्थी को 147750 रुपये नकद मिल जाते हैं। इसके अलावा उसे मुफ्त बिजली कनेक्शन तथा मुफ्त रसोई गैस का कनेक्शन भी मिलता है। कुशीनगर जिले में इस वर्ष 13723 लोगों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर बनवाने का प्रस्ताव भेजा गया था। जांच के बाद इनमें से 13643 आवासों के निर्माण को वित्तीय मंजूरी भी मिल गई। परंतु प्रथम किस्त का बजट 13629 लोगों को ही भेजा गया। इस 13629 को ही इस वित्तीय वर्ष का अब अंतिम लक्ष्य मानते हुए कार्रवाई की जा रही है। 

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आवास निर्माण के लिए मिलने वाले 1.20 लाख रुपये को तीन किस्तों में दिया जाना है। प्रथम किस्त में 40 हजार, दूसरे किस्त में 70 हजार व अंतिम किस्त में 10 हजार रुपये। बीते सात फरवरी तक की जो प्रगति रिपोर्ट विभागीय अफसरों ने नोडल अफसर के सामने रखा था, उसके अनुसार जिन 13629 आवासों के निर्माण के लिए बजट की प्रथम किस्त जारी हुई थी उसके सापेक्ष दूसरी किस्त 12786 लोगों केे भेजी गई। जबकि तीसरी किस्त केवल 4782 लोगों को भेजी गई है। जिन 4782 लोगों को तीसरी किस्त भेजी गई है उनमें से भी केवल 162 लोगों का ही आवास पूर्ण हो पाया है। 
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आवास निर्माण के मामले की इतनी धीमी प्रगति के लिए सीधे-सीधे बालू की किल्लत को दोषी ठहराया जा रहा है। डीएम, सीडीओ समेत अन्य अफसरों ने जब भी इसकी जांच की है तो एक ही जवाब मिलता है कि बालू की कमी के चलते निर्माण कार्य में देरी हो रही है। हालांकि जिनके आवास पूर्ण हुए हैं या जिन्हें तीसरी किस्त मिली है उन्होंने भी बालू का कहीं न कहीं से इंतजाम किया ही है। दूसरी बात यह है कि जिले में बालू खनन पर रोक के बावजूद हर दिन बालू लदी गाड़ियां जा रही हैं। प्रशासन ने पहले से ही सरकारी योजनाओं के तहत होने वाले निर्माण कार्य के लिए बालू पर रोक नहीं लगाई है। 
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