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आशंका में कटी रात, दिनभर सहमे रहे ग्रामीण

Wed, 18 Apr 2018 12:10 AM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
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सन्नाटा - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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तुर्कपट्टी।       पुलिसिया कार्रवाई के बाद से ही रुदवलिया गांव के लोग इतने सहम गए हैं कि सोमवार की रात लोगों ने दुबारा कार्रवाई की आशंका में जागते हुए बिताई। मंगलवार को दिन में भी लोग डर हुए थे। दहशत का आलम यह है कि गांव के जिन घरों में मांगलिक कार्य होने हैं वे भी गिरफ्तारी के भय से बाहर नहीं निकल रहे हैं। मंगलवार को कम ही बच्चे स्कूल आए।
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कसया-तुर्कपट्टी मार्ग पर बसे रुदवलिया गांव की आबादी करीब पांच हजार है। तीन टोले में बंटे इस गांव के जिस टोले पर पुलिस का कहर बरप रहा है वहां की आबादी लगभग तीन हजार है। अधिकांश मजदूर वर्ग की आबादी वाले इस टोले के लोग रविवार की रात से चल रहे विवाद व पुलिस की बर्बर कार्रवाई से सहम गए हैं। हालत यह हो गई है कि मुख्य मार्ग पर डायल 100 की गाड़ी का सायरन सुनकर लोग घर के भीतर छिप जा रहे हैं। गांव की प्रधान विद्यावती देवी का कहना है कि  बेकसूर महिलाओं व पुरूषों पर पुलिसिया कहर इस कदर टूटा है कि लोग खाकी रंग से डरने लगे हैं। गांव की बुजुर्ग महिला सुबुजनी ने कहा कि दो रात हो गए गांव में कोई सो नहीं रहा है। अपने नाती-पोते को लेकर परेशान हूं। कहीं दरोगा उन्हें न उठा ले जाय। घर के बच्चे डर के मारे स्कूल नहीं जा रहे हैं। बड़े लोग चौराहे पर नहीं जा रहे हैं। पूर्व ग्राम प्रधान लालसा चौहान ने कहा कि मांगलिक कार्यों का समय है। कई घरों में तिलक व विवाह के कार्यक्रम हैं। लेकिन पुलिस के भय से कोई बाहर नहीं निकल रहा है। निर्दोष लोगों पर संगीन धराओं में केस दर्ज कर पुलिस ने जुल्म ही इंतहा कर दी है। मुहम्मद अली का कहना है कि पुलिस का ऐसा उत्पीड़न तो ब्रिटिश काल में ही सुना था।
रुदवलिया गांव में सोमवार को बरपे पुलिसिया कहर के बाद अब निरीह ग्रामीणों को कठोर कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा। पुलिस ने एसआई की तहरीर पर गांव के 18 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर दिया है। आरोपियों में दो नाबालिगों का भी नाम है। इसके अलावा तीन महीना पहले आंध्र प्रदेश गए युवक को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपी बनाए गए सात लोग तो एक ही परिवार के हैं। 
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रविवार की रात रुदवलिया गांव निवासी ग्यासुद्दीन और दो पुलिस कर्मियों के बीच विवाद हुआ था। सोमवार की दोपहर में पुलिस ने गांव पहुंचकर जमकर तांडव मचाया। इसी बर्बर कार्रवाई के बाद उल्टे गांव के ही 18 लोगों पर केस भी दर्ज किया गया है। एसआई लल्लन यादव की तहरीर पर ग्यासुद्दीन, राजकरीम, अब्दुल रहीम, रुस्तम, यूसुफ, रहमान, इम्तियाज, मैनुद्दीन, वकार, अपेश, सूरज, शनिदेवल, दिवाकर, मुंसरीम आदि के खिलाफ तोड़फोड़, गोलबंद होकर हमला करने तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने आदि से संबंधित धारा में केस दर्ज किया है। आरोपियों में पुलिस की पिटाई से घायल ग्यासुद्दीन के अलावा 15 और 16 वर्ष के दो किशोर भी हैं। इसके अलावा साबिर नामक जिस युवक पर केस दर्ज है वह बीते तीन माह से आंध्र प्रदेश के एक शहर में नौकर करता है।  
सपा जिलाध्यक्ष मुहम्मद इलियास अंसारी के साथ 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को पीड़ितों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। नेताओं ने दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। 
फाजिलनगर के पूर्व विधायक विश्वनाथ सिंह एवं विधान परिषद सदस्य रामअवध यादव ने कहा कि जिस तरह पुलिस ने जबरन घर में घुसकर निर्दोष महिलाओं व बच्चों की बर्बर पिटाई की है और कीमती वस्तुओं को तोड़कर तहस-नहस किया है वह निंदनीय है। जब तक तुर्कपट्टी थाने कब सभी पुलिसकर्मियों को हटाया नहीं जनाता तब तक इस कांड की सत्यता सामने नहीं आएगी। जिलाध्यक्ष ने कहा कि बुधवार को सपा का प्रतिनिधि मंडल एसपी से मिलकर घटना के उच्च स्तरीय जांच की मांग करेगा। 
प्रतिनिधिमंडल में अलाउद्दीन अंसारी, डॉ. सत्येंद्र पांडेय, उग्रसेन यादव, कैसर जमाल टीटू, एके बादल, सिंहासन यादव, जाकिर हुसैन एवं ग्यासुद्दीन अंसारी आदि शामिल थे।  
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