जन सामान्य की सुविधा के लिए होने वाले छोटे-छोटे आविष्कारों को भी अब यूपी सरकार मान्यता प्रदान करेगी। इसके लिए तकनीकी विश्वविद्यालयों और पॉलिटेक्निक कालेजों को नोडल सेंटर बनाया जा रहा है। ऐसे आविष्कारों को प्रदेश सरकार की तरफ से पुरस्कृत भी किया जाएगा। नियोजन विभाग इस पूरे कार्यक्रम की निगरानी करेगा। इसके लिए जिला स्तर पर एक कमेटी भी बनेगी, जिसमें जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी पदेन सचिव होंगे।
विज्ञान के आविष्कारों का जीवन में अपना महत्व है। विकास की ऊंचाइयों के बाद भी इस क्षेत्र में अभी भी अपार संभावनाएं हैं। गांवों और नगरों में भी लोग अक्सर छोटे-छोटे आविष्कार करते हैं, लेकिन मान्यता और संसाधन के अभाव में ये सिमटकर रह जाते हैं। प्रदेश सरकार ‘मेकिंग यूपी’ अभियान के तहत ऐसे आविष्कारों को आगे बढ़ाया जाएगा। शुक्रवार को हनुमान इंटर कालेज पडरौना पहुंचे नियोजन विभाग के दीर्घकालीन योजना प्रभाग के निदेशक डॉक्टर आनंद मिश्र ने बताया कि बच्चों में विज्ञान के प्रति ललक बढ़ाने के उद्देश्य से स्कूलों में तोड़-फोड़-जोड़ कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है।
इसके तहत कई वस्तुएं स्कूलों में रखी जाएंगी, जिन्हें बनाने की विधियों के विषय में बच्चे स्वयं प्रयास करके सीखेंगे। प्रयोग के तौर पर हनुमान इंटर कालेज में इसी सत्र से यह कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
इसके अलावा स्कूली बच्चों या किसी भी अन्य व्यक्ति की तरफ से विकसित उपकरणों को नवीनता, जन सहभागिता और लोक महत्व के आधार पर चयनित किया जाएगा। इन आविष्कारों को जिला स्तर पर गठित समिति पंजीकृत करेगी। इनके प्रमाणिकता की जांच के लिए फिलहाल मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय गोरखपुर, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी लखनऊ और कानपुर में दो सेंटर बनाए जा रहे हैं।
बाद में प्रदेश के सभी पॉलिटक्निक कॉलेजों को भी इससे जोड़ा जाएगा। जिला स्तरीय समिति में पंजीकृत इन आविष्कारों की प्रमाणिकता पुष्ट होने के बाद राज्य स्तरीय समिति भी इनकी जांच करेगी और जनहित के उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए आविष्कारकों को पुरस्कृत किया जाएगा। सबका उद्देश्य बस इतना है कि लोगों में वैज्ञानिक विकसित हो और छोटे-छोटे उद्यम के जरिए लोग स्वरोजगार के प्रति भी प्रेरित हों।