फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोऑपरेटिव बैंक से उम्मीदें जगीं

Fri, 08 Jul 2016 11:32 PM IST
kushinagar
विज्ञापन
उम्मीद - फोटो : santosh verma
विज्ञापन
पडरौना। उत्तर प्रदेश के प्रथम कोऑपरेटिव बैंक दि देवरिया-कसया जिला सहकारी बैंक को नया लाइसेंस और 251.33 करोड़ रुपये बजट मिल जाने से जिले के ढाई लाख खातेदारों की उम्मीदें जग गई हैं। आठ साल से बंद पड़े कारोबार को फिर शुरू करने से पहले इस बैंक की सभी 24 शाखाओं को हाईटेक किया जाना है। इसके लिए जिला प्रशासन ने भी 2.73 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। माना जा रहा है कि महीने भर के अंदर इन बैंकों में चहल-पहल शुरू हो जाएगी। सहकारी बैंकों के चालू होने से न सिर्फ ढाई लाख लोगों को अपना अपना डूब चुका धन वापस मिल जाएगा, बल्कि आगे भी खेती के लिए सहजता से ऋण मिलना शुरू हो जाएगा। 
विज्ञापन


दि देवरिया-कसया जिला सहकारी बैंक को वर्ष 1906 में बैकिंग लाइसेंस मिला था और इस बैंक का लाइसेंस नंबर भी एक था। कुशीनगर जिले में इस बैंक की 24 शाखाएं और इससे जुड़ी 145 सहकारी समितियां हैं। बैंक व इन समितियों में करीब 500 कर्मचारी कार्यरत हैं जबकि ढाई लाख लोग खातेदार हैं। वर्ष 2005 से पहले बैंक व उससे जुड़ी समितियों की हालत बहुत अच्छी थी। कोऑपरेटिव विभाग के अनुसार उस वक्त ग्राहकों का करीब 80 करोड़ रुपये बैंक की विभिन्न शाखाओं में जमा थे और लगभग इतना ही कर्ज बैंक का खातेदारों पर भी था। परंतु अचानक ही सरकार ने एक लाख से कम के बकाएदारों से वसूली पर सख्ती करने से मना कर दिया। लिहाजा अधिकांश लोगों ने रुपये जमा नहीं किया। इसके चलते सबसे पहले साधन सहकारी समितियों का कारोबार ठप हो गया। इसके बाद सरकार की तरफ से किसानों के लिए लागू की गई ऋण माफी स्कीम का भी पैसा समय से नहीं मिला। नतीजतन, वर्ष 2007 में बैंक घाटे में चला गया और इसकी तरलता (रुपयों का लेन-देन) खत्म हो गई। इसके बाद आरबीआई ने भी बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया। कारोबार ठप होने से बैंक से जुड़े ढाई लाख लोगों की जमा पूंजी भी फंस गई। 

वर्ष 2008-09 में बैजनाथन कमेटी ने बंद पड़े सहकारी बैंकों को चालू करने के लिए नाबार्ड के जरिए 954 करोड़ रुपये ऋण स्वीकृत किया था, लेकिन शर्तें पूरी न होने के चलते रुपये वापस हो गए। पिछले साल से इस मामले में फिर तेजी आनी शुरू हुई। बैंक संचालन के लिए भरपूर आर्थिक मदद के साथ-साथ आरबीआई से लाइसेंस की भी जरूरत थी। इसके लिए उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक अखिलेश कुमार वाजपेयी और अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक (बैंकिंग) सुरेश चंद द्विवेदी ने व्यक्तिगत रुचि लेकर प्रयास किया। फलस्वरूप राज्य सरकार ने इस बैंक के लिए 187.17 करोड़, नाबार्ड से 21.38 करोड़ और भारत सरकार ने 42.78 करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिए। बैंक संचालन के लिए 251.33 करोड़ रुपये मिल जाने पर आरबीआई ने भी बैंकिंग कारोबार के लिए लाइसेंस दे दिया। बीते बुधवार को प्रमुख सचिव/आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता किशन सिंह अटोरिया ने बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डीएन यादव, अध्यक्ष रामप्यारे यादव और उपाध्यक्ष सीताभूषण यादव को इससे संबंधित पेपर दे दिए। विभाग एवं बैंक से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार बैंक शुरू होते ही खातेदारों का भुगतान होना शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन


सीबीएस, नेटबैंकिंग की भी होगी सुविधा
पडरौना। आरबीआई ने बैंकिंग लाइसेंस देने के साथ ही बैंक को हाईटेक बनाने की शर्त जोड़ रखी है। इसके लिए जिला प्रशासन ने जिला योजना के मद से 2.73 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इस धन से सभी 24 शाखाओं के कम्प्यूटरीकरण का कार्य होगा। सीबीएस और नेट बैकिंग की सुविधा मिलने से यह बैंक भी अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों से मुकाबला कर सकेंगे।

तीन जगह एटीएम लगाने का भी है प्रस्ताव
पडरौना। नए सिरे से संवरने जा रहे इन बैंकों में एटीएम भी सुविधा होगी। निबंधन विभाग ने पहले चरण में पडरौना, कसया और हाटा शाखा पर एटीएम लगाने का प्रस्ताव भेजा है। इसके बाद अन्य शाखाओं पर भी एटीएम लगाए जाएंगे।
नोड्यूज वालों को ही मिलेगी सुविधा
पडरौना। बैंक को लाइसेंस मिलने के साथ ही एक बार फिर बकाएदारों की सूची बननी शुरू हो गई है। वित्तीय लेन-देन के लिए खातेदारों को बैंक अथवा सहकारी समितियों से लिए गए लोन को चुकता कर रसीद लेनी होगी। इस रसीद के आधार पर ही बैंक उन्हें नया ऋण देगा। जिले के प्रभारी एआर कोऑपरेटिव/अपर जिला सहकारी अधिकारी लोकेश राज रत्नम और एडीसीओ ब्रजेश पाठक ने बताया कि बैंक संचालन के लिए शासन की तरफ से बृहद दिशा निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें