नौमी के पिता ने कहा, उम्र का फासला ऐसा कि चाह कर भी नहीं कुछ कर पाया
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। नौमी के पिता सरयू (62) ने बुधवार की रात हुई अगलगी की घटना का जिक्र करते हुए रो दिया। बोले कि कलेजे के टुकड़े आखों के सामने जलकर मर गए, लेकिन उम्र का ऐसा फासला है कि चाह कर भी नहीं कुछ कर पाया। आंखों से कमजोर अपनी पत्नी को किसी तरह खेत में दूर लेकर जाकर छोड़ा। नहीं तो वह भी आग की चपेट में आ गई होती। भगवान की इस परिवार का सहारा है। अब कहना क्या है।
गमजदा सरयू ने बताया कि गर्मी इतनी थी कि नींद देर से लगी थी। अपनी झोपड़ी के पास पत्नी शनीचरी के साथ सोया था। अचानक नौमी आग लाग गईल- आग लाग गईल... चिल्लाने लगा। आंख खुली तो आग की लपटें देखकर घबरा गया। शोर मचाते हुए आग की तरफ बढ़ा लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पीछे हटना पड़ा।
नौमी बोला कि बच्चे और पत्नी भी झोपड़ी में हैं। जबकि बच्चे नौमी के पास बाहर शाम को सोए थे और बहू कहीं गई थी। आग की लपटें देखकर मोहल्ले से आए आए दस-बारह लोगों की मदद से झोपड़ी का फाटक (चचरा) तोड़ने का प्रयास किया गया। लेकिन अंदर से बंद होने के कारण नहीं टूटा। आग की लपटों के बीच बच्चों और बहू की चीखने की आवाज कान में गूंजी तो कलेजा फट गया।
बताया कि हालात ऐसे थे कि चाह कर भी कुछ नहीं किया जा सका। नौमी जब फेरी पर चला जाता था तो सभी बच्चे हमारे पास खेलते थे। अधिकारी, साहब गांव के लोग आइल लेकिन पतोहिया और नतीयन क मौत हो गईल रहे। बोले कि बुढ़वती में अब इहे देखल बाकी रहल ह। नौमिया के अब का होई। हमरो झोपड़िया जल के राख हो गईल।
कांग्रेसी बोले नीतिगत मदद करें
रामकोला। उर्दहा वार्ड में अगलगी की घटना में मां और पांच बच्चों की मौत हो गई। बृहस्पतिवार को कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह पीड़ित परिवार से मिले। उन्होंने कहा कि यह हृदयविदारक घटना है। जनपद में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं मन को आहत कर रही है। प्रशासन उनकी नीतिगत मदद करें। इस दौरान तारकेश्वर सिंह,स्वामीनाथ यादव, जय गोविंद राव, नियमतुल्लाह, प्रेमनारायण तिवारी मौजूद रहे।