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Kushinagar News: नारायणी नदी दो धाराओं में बंटी, यूपी-बिहार दोनों तरफ कटान

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नारायणी नदी में सिल्ट टीले से कटान, विभाग बोल्डर-जियो बैग डालकर रोक रहा
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तरया सुजान (कुशीनगर)। अहिरौलीदान के नोनिया पट्टी के पास नारायणी (गंडक) नदी में एक विशाल रेत और सिल्ट का टीला जमा हो गया है। करीब एक किलोमीटर लंबे इस टीले के कारण नदी की धारा बदल गई है। इससे उत्तर प्रदेश के एपी तटबंध और बिहार की तरफ कटान का खतरा बढ़ गया है।
यह टीला नदी को दो धाराओं में बांट रहा है। दोनों धाराएं अलग-अलग किनारों पर कटान कर रही हैं। करीब चार से पांच किलोमीटर तक अलग बहने के बाद ये धाराएं बिहार के मंगलपुर स्थित बड़े पुल के पास फिर मिलती हैं। क्षेत्र के लोगों के अनुसार, पिछले 10 से 15 वर्षों में लगातार सिल्ट जमा होने से नदी का पाट उथला हो गया है। अब नदी के बीच में कई सौ मीटर चौड़ा रेत का टीला बन गया है।
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नदी के इस बदलाव से आसपास के गांवों के किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। एक धारा उत्तर प्रदेश के एपी तटबंध से टकरा रही है, जबकि दूसरी बिहार की ओर दबाव बना रही है। तेज बहाव के कारण दोनों तरफ कटान का खतरा बना हुआ है। अहिरौलीदान, खैरखुंटा और बाघाचौर के ग्रामीणों का कहना है कि टीला हटाए बिना कटान का स्थायी समाधान मुश्किल है। हर साल सैकड़ों बीघा कृषि भूमि नदी के कटान में समा रही है। मुन्ना सिंह, रामनाथ सिंह, सुरेश सिंह सहित कई किसानों ने सिंचाई विभाग से ड्रेजिंग की मांग की है। उनका कहना है कि गाद हटाकर जलधारा को व्यवस्थित किया जाए। इससे तटबंध और कृषि भूमि को कटान से बचाया जा सकेगा।
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वर्जन
नारायणी नदी का कटान रोकने के लिए तटबंध पर बोल्डर और जियो बैग डलवाया जा रहा है। हालात की लगातार निगरानी की जा रही है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
-महेश कुमार सिंह, एक्सईएन, बाढ़ खंड
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