कोटवा बाजार। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के रायपुर ख़ास के चंदन बरवां में आयोजित श्री शतचंडी महायज्ञ के चौथे दिन कथा वाचक ने श्रीराम कथा में नारद मोह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति जीव को भवसागर से पार भी करती है। अगर भक्ति का अहंकार हो जाए तो अहंकार युक्त भक्ति जीव का पतन भी कर देती है।
कथा वाचक भैरव दास महाराज ने कहा कि देव ऋषि नारद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। भगवान की भक्ति करने के लिए हिमालय की कंदरा में जाकर एक झरने के किनारे बैठकर भगवान के स्वरूप का आनंद प्राप्त करने लगे। इस दौरान छेदी, कमलेश गुप्ता, रामजी, प्रवीण आदि मौजूद रहे।