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Kushinagar News: बिना अनुमति बहन के ब्रह्मभोज में घर गया था नंदलाल, बाबा ने खदेड़ा था

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पडरौना। बरवापट्टी थाना क्षेत्र के कपरधिक्का गांव के श्रीरामजानकी मंदिर के पुजारी फलाहारी बाबा हत्याकांड के खुलासे से गांव वाले अवाक हैं। पत्नी और बच्चों को भी राजकरन की इस करतूत की जानकारी नहीं थी। पुलिस को घटना में प्रयुक्त चाकू और खून से सना पैंट-शर्ट भी मिला है।
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पुलिस ने बताया कि राजकरन के नौ साल के बेटे नंदलाल को अपना शिष्य बनाकर फलाहारी बाबा मंदिर में पूजा-पाठ कराते थे। वर्ष 2020 में नंदलाल की बहन की मौत हो गई। उसके ब्रह्मभोज में बाबा को बिना बताए घर जाकर नंदलाल भोजन कर लिया। इसकी जानकारी होने पर बाबा ने उसको डांटा। इतना ही नहीं नंदलाल दी गई साइकिल रखवा ली और खदेड़ दिया था। इसके बाद मंदिर से घर जाकर नंदलाल बहुत रोया और बरवापट्टी घाट के सामने नारायणी नदी में कूदकर खुदकुशी कर ली। इसके बाद से राजकरन बदले की आग में जलता रहा।
आखिरकार 13 जनवरी को राजकरन और अपने दोस्त पश्चिमी चंपारण के मनोज शर्मा के साथ सुनियोजित तरीके से फलाहारी बाबा की हत्या की वारदात को अंजाम दे दिया। वारदात के पांच दिन पूर्व से ही मंदिर का सीसीटीवी कैमरा बंद पड़ा था। घटना के बाद जब एसपी संतोष कुमार मिश्रा गांव पहुंचे तो आरोपी राजकरन महतो की पत्नी भीड़ में सबसे पहले आगे आई और ऊंचे आवाज बोली फलाहारी बाबा जिंदा चाहिए। वह गांव वालों के हर दुखदर्द में शामिल रहते थे, उनसे किसी का कोई बैर नहीं था।
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पुलिस के अनुसार, नंदलाल की मौत के बाद राजकरन काफी दुखी रहता था। इसके चार पुत्रों में नंदलाल सबसे छोटा था। उसका मानना था कि बाबा ने कोई ऐसा तंत्र-मंत्र कर दिया है, जिससे उसके बेटे ने नदी में कूदकर खुदकुशी कर ली। मगर उसने यह बात दिल में दबाए रखी और मन ही मन बाबा की हत्या के बारे में सोचता रहा। वहीं, राजकरन के दोस्त मनोज शर्मा का घर मंदिर से करीब दो किमी दूरी पर पश्चिमी चंपारण जिले में है। वह भूइधरवा बाजार में साइकिल का पंक्चर बनाता था और मंदिर पर नियमित रूप से चार बजे भोर में पूजा करने पहुंचता था और बाबा की जड़ी-बूटी वाली चाय पीता था। घटना के बाद दोनों पर किसी को शक नहीं था, लेकिन राजकरन महतो के सुबह की गतिविधियों और बाबा के करीबी होने के कारण पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की। कड़ाई से पूछताछ में उसने कत्ल का राज और मददगार दोस्त का नाम उगल दिया।

फलाहारी बाबा का करीबी था राजकरन
हत्यारोपी राजकरन महतो का घर मंदिर से करीब 300 मीटर दूरी पर है। मंदिर पर राजकरन का आना-जाना रहता था। मंदिर पर कोई धार्मिक कार्यक्रम भी होता था तो फलाहारी बाबा राजकरन को जिम्मेदारी देते। बेटे नंदलाल की खुदकुशी करने के बाद भी राजकरन का मंदिर पर आना-जाना लगा रहा और फलाहारी बाबा से उसी तरह लगाव था। इसका दोस्त पश्चिमी चंपारण जिले के भुलईधरवा का रहने वाला मनोज शर्मा मंदिर से करीब तीन किमी दूरी पर पंक्चर की दुकान चलाता था। रोज भोर में वह मंदिर पर पूजा करने पहुंचता था। वह भी बाबा का काफी करीबी था। पुजारी की हत्या के बाद राजकरन महतो भी गांव वालों के साथ मिलकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगा और हत्या का पर्दाफाश करने की मांग करता रहा। इसके चलते गांव वालों या पुलिस को इस पर थोड़ा भी संदेह नहीं हुआ। दूसरे दिन खोजी कुत्ते के आने पर पुलिस को सुराग मिला और राजकरन और बर्तन धुलने वाली महिला को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इसके बाद फलाहारी बाबा की हत्या का राज खुला।
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