पडरौना। संयुक्त जिला चिकित्सालय में जांच के नाम पर कई महंगे उपकरण उपलब्ध हैं। मसलन, सिटी स्कैन मशीन, अल्ट्रासाउंड, खून जांचने की एवीजी आदि उपकरण खराब होने के कारण इलाज प्रभावित हो रहा है। अधिकांश उपकरण खराब होने के बाद भी इन्हें ठीक नहीं कराया जा रहा है।
आग से झुलसे लोगों को भर्ती करने के लिए जिला अस्पताल भवन के प्रथम तल पर आइसोलेशन वार्ड बना है। उसमें दो एसी लगाई गई है, ताकि उसका तापक्रम सामान्य बना रहे और मरीजों की परेशानी न बढ़े। लेकिन यह एसी गर्मी शुरू होने के समय से ही खराब है। इस कारण भर्ती मरीजों की तकलीफ गर्मी में बढ़ गई है। इंसेफेलाइटिस के मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल परिसर में 10 बेड का आईसीयू भवन बना है। इसमें लगे दस वेंटिलेटर में से सात खराब हैं। ऐसी दशा में भर्ती मरीजों को बारी-बारी इस पर लिटाया जाता है। इस वार्ड में खून जांच के लिए लगी एवीजी भी खराब है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में आने वाले गंभीर बीमारियों से पीड़ित और दुर्घटनाग्रस्त लोगों की जांच के लिए तीन वर्ष पूर्व तत्कालीन पेट्रोलियम राज्यमंत्री व सांसद आरपीएन सिंह ने गेल से संपर्क कर करीब दो करोड़ रुपये की लागत की सिटी स्कैन लगवाया था। यह मशीन संचालित करने के लिए इसके विशेषज्ञ और जेनरेटर की सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसकी वजह से इस कीमती उपकरण का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। मरीजों को निजी डाइग्नोसिस सेंटरों पर महंगी कीमत में जांच करानी पड़ रही है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. लालता प्रसाद का कहना था कि वेंटीलेटर, एवीजी, आइसोलेशन वार्ड की एसी सहित अन्य सभ ीतरह की समस्याओं को दूर कराने का प्रयास किया जा रहा है।