सुकरौली। क्षेत्र में छिड़काव व फॉगिंग नहीं होने से गंदे नालों और घरों के आसपास जमा पानी में मच्छर पनप रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही मच्छरों के चलते लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चों और बुजुर्गों में बुखार और अन्य बीमारियों की शिकायतें भी बढ़ने लगी हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से स्थिति और खराब हो गई है। एडीओ पंचायत उषा कुशवाहा ने बताया कि हाल ही में उनकी तैनाती हुई है। तैनाती के पहले छिड़काव हो चुका है। इस समय किसी गांव में छिड़काव नहीं हो रहा है।
बगैर छिड़काव साढ़े छह लाख का भुगतान, फाइलों में सिमटी जांच
सुकरौली। क्षेत्र में ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत मच्छररोधी छिड़काव किए बिना करीब तीन साल पहले 6 लाख 60 हजार के भुगतान का मामला सामने आया था। सीएचसी के तत्कालीन प्रभारी डॉ. स्वप्निल श्रीवास्तव ने जांच शुरू कराई, तो पता चला कि 66 गांवों में कागजों पर छिड़काव दिखाकर भुगतान कर दिया गया, जबकि कई गांवों में छिड़काव हुआ ही नहीं था।
सीएचसी प्रभारी ने सीएमओ समेत अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों को अवगत कराया था। तत्कालीन बीडीओ उषा पाल की जांच के दौरान महज एक गांव में ही छिड़काव होने की बात स्वीकार की गई थी। तभी से इस प्रकरण की जांच चल रही है। दोषियों पर कार्रवाई और जांच कागजों तक सिमट गई है।