कुशीनगर लोटस निक्को होटल में रामकथा सुनाते मोरारी बापू। अमर उजाला ब्यूरो
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मन के संशय को मिटाता है सुंदर कांड : मोरारी बापू
- एक भक्त की चिट्ठी को पढ़कर मोरारी बापू ने दिया जवाब
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। रामकथा के दूसरे दिन रविवार को मोरारी बापू ने कथा की शुरूआत से पहले भक्तों की चिट्ठियों को बड़े ध्यान से पढ़ा। इसके बाद लंदन की एक महिला भक्त की चिट्ठी को पढ़कर भी सुनाया।
महिला ने इस चिट्ठी में लिखा था कि बापू मैं सुंदरकांड का नियमित पाठ करती हूं। इसका पाठ करने से क्या फायदा है। बापू ने इस चिट्ठी का जवाब देते हुए कहा कि फायदा और नुकसान एक दूसरे के सापेक्ष है। जैसे सुख-दुख, जन्म-मृत्यु, प्रकाश-अंधकार आदि। ये ऐसे शब्द हैं जो अकेले नहीं आते। बापू ने कहा अध्यात्म में नुकसान हो जाए तो ग्लानि नहीं करनी चाहिए। सुंदरकांड का पाठ करने से क्या फायदा होगा, इस संशय का जवाब गोस्वामी तुलसीदास ने सुंदरकांड के अंत में वर्णित किया है। उन्होंने कहा कि सुंदरकांड पाठ से फायदा ही फायदा है। इसका पाठ कलियुग का मैल धोता है। सुंदरकांड पाठ से कोई धन लोलुपता की पूर्ति नहीं होती है। फैक्ट्री, गाड़ी और बंगला नहीं मिलता है। मन का कचरा निकल जाता है। इससे सुख ही सुख मिलता है। इससे मन का संशय मिटाता है। महाभारत के युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि अर्जुन भी महाभारत युद्ध देखकर तनाव में चले गए थे। श्रीकृष्ण ने उनका संशय दूर किया था। सुंदर कांड भी मन का संशय दूर करता है।