फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोरारी बापू ने विश्व शांति के लिए अस्त्र शस्त्र का त्याग जरूरी बताया

विज्ञापन
विज्ञापन
मोरारी बापू ने विश्व शांति के लिए अस्त्र शस्त्र का त्याग जरूरी बताया
विज्ञापन

कसया। अपने तीन घंटे के प्रवचन में मोरारी बापू ने निर्वाण शब्द की विधिवत व्याख्या की। कहा कि रामचरित मानस में निर्वाण शब्द का प्रयोग सब के लिए किया गया है। वास्तव में भगवान किसी की हत्या कर ही नहीं सकते। वे तो निर्वाण देकर उसे दूसरे जन्म में भेजते हैं।
विज्ञापन

शाम चार बजेे कथा का शुभारंभ करते हुए बापू ने कहा कि जब वे यहां कथा के बारे में सोच रहे थे तब निर्वाण पर भी विचार कर रहे थे। रामचरित मानस में गोस्वामी जी ने आठ बार निर्बाण शब्द का प्रयोग किया है। यह विचार का प्रश्न है कि पूरे महाग्रंथ में केवल आठ बार ही इस शब्द का प्रयोग क्यों हुआ है। इसमें से भी किसी चौपाई में निर्बाण की चर्चा नहीं है। पांच बार निर्बाण, एक बार निरबाण व दो बार निर्वाण शब्द की चर्चा है। सुदंरकांड के मंगलाचरण में और उत्तर कांड के रूद्राष्टक के अलावा अरण्य कांड में भी निर्बाण शब्द का प्रयोग है। अरण्य कांड में मारिच के लिए इस शब्द का प्रयोग किया गया है। रुद्राष्टक में इस शब्द का प्रयोग कागभुसुंडी के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि भगवान राम किसी की हत्या नहीं कर सकते। इसीलिए उन्होंने अपनी लीलाओं के दौरान असुरों को भी निर्वाण प्रदान किया। इसी प्रकार भगवान परशुराम और भगवान कृष्ण ने भी आसुरी प्रवृत्तियों का नाश किया और मानवों को पुन: अच्छे वातावरण में रहने के लिए प्रेरित किया। इसीलिए लंका से लौटने के पश्चात भगवान श्रीराम ने अपने गुरु के आगे धनुष-बाण का त्याग कर दिया था। जबकि भगवान परशुराम ने पूर्णावतार होने पर अपने अस्त्र शस्त्र का त्याग किया था। भगवान कृष्ण ने महाभारत काल में हथियार नहीं उठाने की प्रतिज्ञा की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें