चार साल पहले ही आदर्श रेलवे स्टेशन घोषित हुए पडरौना रेलवे स्टेशन पर अब भी यात्री सुविधाओं का अभाव है। पुराने प्लेटफार्म के विस्तारीकरण के बाद भी यहां यात्रियों के लिए शेड व बेंच तक पर्याप्त नहीं हैं। पेयजल के लिए लगी टोटियों से हर वक्त पानी बहता रहता है। स्टेशन पर शौचालय तक की व्यवस्था ठीक नहीं है।
थावे-कप्तानगंज रेल मार्ग का पडरौना रेलवे स्टेशन जिला मुख्यालय पर होने के नाते लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। इस रेल मार्ग के उच्चीकरण के साथ ही स्टेशन पर यात्री सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद जगी थीं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। प्लेटफार्म की लंबाई तो बढ़ी लेकिन उस अनुपात में शेड तक नहीं बढ़ाए गए। रेल कर्मचारियों की मानें तो वर्ष 2013 के रेल बजट में ही इसे आदर्श रेलवे स्टेशन बनाने की घोषणा की गई थी। परंतु इस घोषणा का भी यहां कोई असर नहीं हुआ। स्टेशन पर यात्रियों के बैठने व ट्रेन की प्रतीक्षा करने के लिए कोई नई व्यवस्था नहीं बनाई गई। आरक्षण और सामान्य टिकट के लिए एक-एक काउंटर ही हैं। इसकी वजह से ट्रेन आने के वक्त टिकट के लिए धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है। आरक्षित टिकट के लिए भी लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। यात्रियों के पेयजल के लिए लगी टोटी और हैंडपंप भी अक्सर खराब ही रहते हैं। प्लेटफार्म पर महिला और पुरुष के लिए एक-एक शौचालय बना है, लेकिन उसमें हर वक्त ताला बंद रहता है। रेल यात्रियों का कहना है कि प्लेटफार्म की बाउंड्री नहीं होने की वजह से शाम ढलते ही प्लेटफार्म के दूसरे हिस्से में अराजक तत्व अड्डा जमा लेते हैं। इसकी वजह से अक्सर ही लोगों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं होती रहती हैं।
इस संबंध में रेलवे स्टेशन मास्टर राकेश सिंह का कहना है कि धीरे-धीरे व्यवस्था में सुधार हो रहा है। यात्री अगर किसी मामले की शिकायत करते हैं तो तुरंत ही उसका निपटारा भी कराया जा रहा है। आदर्श स्टेशन घोषित होने के बाद व्यवस्था में काफी सुधार आया है।