तुर्कपट्टी। छहूं गांव में करीब एक वर्ष पहले मंदिर निर्माण की नींव खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों की जांच के लिए बृहस्पतिवार को राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी की अगुवाई में एक टीम गांव पहुंची थी। टीम ने मूर्तियों व गांव के विभिन्न टीलों का निरीक्षण करने के बाद इस गांव को प्राचीन काल का आध्यात्मिक केंद्र माना। मूर्तियों को भी गुप्त कालीन बताया गया।
भारतीय सांस्कृतिक निधि गोरखपुर की तरफ से उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग को ग्राम सभा छंहू में खुदाई में प्राप्त मूर्तियों के निरीक्षण के लिए पत्र भेजा गया था। इस पत्र के आधार पर क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी नरसिंह त्यागी ग्राम सभा छहूं पहुंचे और मूर्तियों एवं गांव में स्थित 14 टीलों सहित विभिन्न पुरावशेषों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के उपरांत नरसिंह त्यागी ने बताया कि यहां आठवीं-नौवीं शताब्दी के वक्त की ईंटों से बने मंदिर का अवशेष है। प्राप्त ईंटों के माप एवं प्रतिमाओं की वास्तु कला शैली के आधार पर इन मूर्तियों को गुप्त काल के अंतिम समय का माना जा रहा है। गणेश, कार्तिकेय, ब्रह्मा, अग्नि, सूर्य, नवग्रह पट्ट एवं बाराह की मूर्तियों में बाराह रूप भगवान विष्णु के अवतार का एक रूप है। अग्नि देवता की मूर्ती जिसमें आग की लपटें भी प्रदर्शित हैं तथा नवग्रह की पट्ट भी अपने आप में एक विशेष स्थान रखता है। एक गांव में इतने टीलों का मिलना इस बात का संकेत है कि पहले यहां आध्यात्मिक केंद्र रहा है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी के साथ आये इंटेक्ट गोरखपुर के संयोजक एनपी कंदोई ने बताया कि इस गांव के लोगों को सांस्कृतिक विरासत का आभास होने पर इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा होने लगी है। निरीक्षण करने आई टीम में डा. केके पांडेय व अशोक कमानी ने भी पुरावशेषों का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्राम प्रधान रीना यादव, उमाशंकर राय, केदारनाथ ओझा, रवि यादव, रामाशीष गोंड, आनंद यादव, रंजीत मिश्रा, प्रताप यादव, दीना मिश्र एवं चंदेश्वर आदि मौजूद रहे।