पडरौना। मौनी अमावस्या पर जिले से लगी बड़ी गंडक (नारायणी) नदी, छोटी गंडक और बांसी नदी में बुधवार को भोर में हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। उसके बाद नदी से बाहर आकर गो दान किया तथा मंदिरों में पूजा-अर्चना कर परिवार की सुुख-समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना की।
पंडित मदन मोहन मिश्र ने बताया कि माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन मौन रखकर नदियों में डुबकी लगाने का विधान है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है, इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। मौनी अमावस्या के अवसर पर जिले के श्रद्धालु बड़ी गंडक के पनियहवा, भैसहां घाट, पिपराघाट समेत अन्य स्थलों पर डुबकी लगाते हैं। इसी तरह छोटी गंडक और बांसी नदी में भी श्रद्धालु स्नान करने के बाद दान-दक्षिणा देते हैं तथा पूजा-अर्चना करते हैं। यही नहीं यहां से काफी संख्या में भक्त नेपाल के त्रिवेणी में भी स्नान के लिए जाते हैं। आस्थावानों ने छोटी गंडक के हेतिमपुर, रगड़गंज समेत अन्य घाटों पर तथा बांसी नदी में भी डुबकी लगाई।
खड्डा प्रतिनिधि के अनुसार, मौनी अमावस्या के मौक पर छितौनी बगहा रेल पुल स्थित नारायणी तट पर तीन दिवसीय मां नारायणी सामाजिक कुंभ में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। मां नारायणी का पूजन विधि-विधान से कुंभ संयोजक मनोज कुमार पांडेय व नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक निषाद ने किया।
गंडक नदी में ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं ने स्नान शुरू कर दिया। नारायणी के जल में स्नान कर श्रद्धालुओं ने पूजन कर गो दान किया। संयोजक मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि हिमालय के धौलागिरी पर्वत से प्रकट होकर नेपाल के रास्ते बिहार, महराजगंज, कुशीनगर सहित बिहार के विभिन्न जिलों के रास्ते सोनपुर के पास गंगा नदी में समाहित होती है। नारायणी में ही भगवान शालिग्राम (ठाकुर जी) विष्णु के रूप में विराजमान रहते हैं। इस लिए इस नदी को शालिग्रामी भी कहते हैं। इस दौरान अनिल सिंह, प्रवीण गुंजन, अजय साहनी, राकेश निषाद, सुवास सुहाना आदि मौजूद रहे।
छितौनी प्रतिनिधि के अनुसार, पनियहवा नारायणी घाट पर जिले के अलावा महराजगंज, देवरिया, गोरखपुर सीमावर्ती राज्य बिहार के श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। मंगलवार की रात में ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो इसके लिए स्थानीय प्रशासन अलर्ट रहा। खड्डा एसडीएम प्रभाकर सिंह, तहसीलदार महेश कुमार, हनुमानगंज एसओ मनीष पांडेय, एसओ खड्डा हर्षवधन सिंह मेले में भ्रमण कर व्यवस्था की निगरानी करते रहे। पनियहवा नारायणी घाट पर मौनी अमावस्या पर स्नान करने मंगलवार की शाम पहुंचे श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्था पवन दुबे की तरफ से की गई थी।
तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसा,र सेवरही क्षेत्र में बुधवार को मौनी अमावस्या पर स्नान व दान को लेकर मंगलवार से ही बांसी व गंडक नदी के तट पर स्नान करने वालों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने रात्रि में कल्पवास कर आधी रात के बाद से ही पवित्र स्नान शुरू कर दिया था। सेवरही क्षेत्र सहित दूर दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बांसी नदी के शिवाघाट, गौरी घाट, दमकला घाट, गोलाघाट तो गंडक नदी के तट पर जंगली पट्टी, जवही दयाल, विरवट कोंन्हवलिया, बाक खास, बाघाचौर, नोनियापट्टी, अहिरौलीदान सहित अन्य घाटों पर हजारों की संख्या में आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद नदी में दीपदान कर मंदिरों में पूजा अर्चना की और दान किया।
पिपराघाट प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र के जीरो बांधा चौराहा के पास नारायणी नदी पर श्रद्धालुओं ने रात दो बजे से स्नान घाट पर पहुंच गए। स्नान के लिए एक दिन पहले पहुंचे श्रद्धालुओं क लिए पिपराघाट नारायणी नदी घाट के पास ही ग्राम प्रधान रामा निषाद व प्रधान विकास गुप्ता, आरएन यादव, शोभी यादव व बुटाई निषाद, बबलू देवान आदि ने भंडारा आयोजित किया था। लोगों की सुरक्षा के लिए सेवरही एसओ धीरेंद्र कुमार राय व चौकी प्रभारी आकाश सिंह व एसआई रमेश यादव मेला स्थल पर भ्रमण करते दिखे।
रामकोला प्रतिनिधि के अनुसार, मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए बुधवार की सुबह से ही छोटी गंडक बालाछतर घाट पर स्थानीय गांव के श्रद्धालुओं के अलावा पड़ोसी जिला महाराजगंज के सीमावर्ती गांव के श्रद्धालुओं ने स्नान किया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए रामकोला थाना के एसएचओ आनंद कुमार गुप्ता व चौकी इंचार्ज मनोज कुमार द्विवेदी समेत अन्य पुलिस कर्मी नदी घाट पर भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे।
मथौली प्रतिनिधि के अनुसार, कस्बा से होकर गुजरी छोटी गंडक नदी घाट पर मौनी अमावस्या के अवसर पर बुधवार की सुबह क्षेत्र के रगड़गंज, फर्दहा, मुडिला हरपुर, अथरहा आदि गांव के श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान किया।